फ़िल्मी दुनिया

अच्छी कहानी की कमी अश्लीलता से पूरी की जा रही है: जावेद रहमान खान

पटना। 80 के दशक में बिहार में भोजपुरी फिल्मों की नींव रखने वाले फिल्म लेखक और निर्देशक जावेद रहमान खान अब भले ही मिस्र सरकार के साथ मिलकर ‘लव इन कैरो’ जैसी फिल्मों का निर्माण कर रहे हों लेकिन बिहार के प्रति उनका प्रेम आज भी बरकार है। तभी तो इस फिल्म में उन्होंने बिहारी कलाकारों को भी मौका दिया है।

फिल्म ‘लव इन कैरो’ तीन भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी और अरबी में बनी है और बहुत जल्द ही रिलीज होने वाली है। इतना ही नहीं इंडो-मोरक्को फिल्म को-प्रोडक्शन के बैनर तले बनने वाली एक अन्य विदेशी फिल्म में भी उन्होंने बिहारी कलाकारों को मौका दिया है। अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. जावेद रहमान खान ऑस्कर फिल्म पुरस्कार के निर्णायक मंडल के सदस्य भी रह चुके हैं और फिल्मों के सिलसिले में कई मुल्कों का दौरा भी कर चुके हैं।  एक खास बातचीत में उन्होंने वर्तमान में भोजपुरी फिल्मों के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करने के साथ ही देश और दुनिया के फिल्म जगत से जुड़े कई पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। 

आप तो भोजपुरी फिल्मों के स्वर्ण युग से जुड़े रहे हैं। वर्तमान में भोजपुरी फिल्मों में परोसी जा रही अश्लीलता के बारे क्या कहेंगे?
जावेद रहमान : मेरी पहली भोजपुरी फिल्म थी “बाजे शहनाई हमार”। 1980 में रिलीज हुई थी। उस समय नाजीर हुसैन और सुजीत कुमार जैसे लोग भोजपुरी फिल्म बना रहे थे और उनमें खुद भी काम कर रहे थे। बिहार से गिरीश रंजन, तपेश्वर प्रसाद और शिवेंद्र सिन्हा जैसे लोग भोजपुरी फिल्मों में सक्रिय थे। वो लोग समाज को गहराई से समझते थे। फिल्म बनाने के पहले कहानी और स्क्रिप्ट पर खूब मेहनत करते थे। हर चीज का बारीकी से ख्याल रखा जाता था। अब सबकुछ उलट गया है। पहले लोग स्टार इंतजाम करते हैं और फिर कहानी की तलाश करते हैं। कहानी के नाम पर इनके पास बॉलीवुड फिल्मों की नकल करने के आलावा कुछ नहीं होता है।इस समय भोजपुरी फिल्मों के निर्माण की प्रक्रिया में अश्लीलता को भी महत्व दिया जा रहा है। अच्छी कहानी की कमी को अश्लीलता परोस कर पूरा करना चाहते हैं।

हि

Show More

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button