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अपने ही लूटते रहे अस्मत, दोस्त सबसे खतरनाक

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की मानें तो दिल्ली में अब भी महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं है। सबसे शर्मसार करने वाली बात यह सामने आई है कि पिछले साल की तरह इस वर्ष भी सबसे दागदार दोस्त और रिश्तेदार ही रहे। इसके अलावा चाचा, मामा, चचेरा भाई, फूफा समेत सौतेले पिता तक शामिल रहे, जिन्होंने अपनों की आबरू में दाग लगाया। 
आंकड़े के अनुसार वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में महिलाओं के प्रति महज 0.73 की रेप की घटनाओं में कमी आई है। वर्ष 2016 में जहां पर रेप के 2064 मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2017 में रेप के कुल 2049 मामले दर्ज हुए हैं| पिछले साल के तुलना में करीब 18.88 फीसदी और आई टीचिंग के मामले में लगभग 30.54 फीसदी की कमी आई है। सबसे अधिक रेप की वारदात को दोस्त और परिवारिक के करीबियों ने अंजाम दिया। 
आंकड़े बताते हैं कि 38.99 फीसदी रेप की घटना को दोस्त और उनके फैमली फ्रेंड ने अंजाम दिया, जबकि 19.08 फीसदी वारदात की घटना को रिश्तेदारों ने अंजाम दिया। रेप की घटना में साथ में काम करने वाले साथी या वर्कर की संख्या महज 3.86 फीसदी रही। हालांकि इस बार रेप की वारदात में अज्ञात लोगों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बार करीब साढ़े 20 फीसदी रेप के मामले अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया। अन्य अज्ञात लोगों की बात करें तो उनके खिलाफ रेप का महज 3.37 फीसदी ही मामला दर्ज हुआ है। 
दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि पिछले वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में भले ही रेप के मामले कम दर्ज हुए लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में जहां रेप के आरोप में 86 फीसदी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वही 2017 में 92 फीसदी आरोपियों को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 

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