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अभिभावकों के सामने झुका जीडी बिरला स्कूल प्रबंधन

कोलकाता। जीडी बिरला स्कूल में पिछले सप्ताह एक चार साल की बच्ची के यौन-उत्पीड़न मामले में सुरक्षा के लिहाज से लापरवाही बरतने और वारदात पर पर्दा डालने की आरोपित प्रिंसिपल शर्मिला नाथ को हटा दिया गया है। उसके साथ अभिभावकों एवं स्कूल प्रबंधन को लेकर एक ज्वाइंट फोरम बनाने पर सहमति बनी है। वारदात के बाद लगातार छह दिनों से यहां पढ़ने वाले करीब 7 हजार बच्चों के 3 हजार अभिभावक शर्मिला को हटाने की मांग पर अडिग होकर आंदोलनरत थे। इस बीच घटना के बाद से ही स्कूल प्रबंधन ने अनिश्चितकाल के लिए स्कूल को बंद कर दिया था। तब अभिभावक प्रिंसिपल को हटाने के बाद ही स्कूल खोलने पर अडिग थे। इसे लेकर मंगलवार को पुलिस की मध्यस्तता के बाद स्कूल प्रबंधन व अभिभावकों के बीच बैठक हुई थी, जिसमें शर्मिला को हटाने को लेकर आज शाम पांच बजे तक का समय लिया गया था। हालांकि दसवीं व बारवीं के छात्रों की चल रही परीक्षा के मद्देनजर बुधवार को स्कूल खोलने को लेकर अभिभावक दो भागों में बंट गए थे लेकिन प्रिंसिपल को हटाने की मांग पर अभिभावक अडिग थे। देर शाम 7.30 बजे के करीब प्रबंधन ने उन्हें हटाने की घोषणा की जिसके बाद गुरुवार से स्कूल को पूर्ववत खोलने पर सहमति बन गई है। घटना के बाद स्कूल में सुरक्षा के इंतजाम भी पुख्ता कर दिए गए हैं। पूरे परिसर में चारों ओर कैमरे लग गए हैं।
ज्ञात हो कि रविवार को पीड़िता बच्ची के परिजनों ने जादवपुर थाने में प्रिंसिपल के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कर वारदात पर पर्दा डालने का आरोप लगाया था तथा आरोपितों को बचाने की कोशिश के कारण उनके खिलाफ भी पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद देर शाम जादवपुर थाने की पुलिस ने शर्मिला के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 (धोखबाजी), 201 (तथ्यों को छिपाने) तथा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
दूसरी ओर सोमवार सुबह उक्त स्कूल में पहुंची राज्य शिशु अधिकार रक्षा आयोग की चेयरपर्सन अनन्या चटर्जी ने भी प्रिंसिपल की गिरफ्तारी की मांग की थी और मंगलवार को भी अभिभावक और प्रंबंधन की मीटिंग में उपस्थित होकर उन्होंने यही दावा किया था। इस बारे में उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से बात कर गिरफ्तारी सुनिश्चित करने को कहा है। वारदात पर पर्दा डालने की आरोपी प्रिंसिपल शर्मिला नाथ से मंगलवार लालबाजार पुलिस मुख्यालय में मैराथन पूछताछ की गई थी। उनसे पूछताछ का सारा वीडियो रिकॉर्ड किया गया है। उनके बयानों का विश्लेषण किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो उन्हें दोबारा बुलाकर पूछताछ की जाएगी।

बताया गया है कि पॉक्सो एक्ट के तहत उनपर दर्ज मामले में पूछा गया है कि आखिरकार उन्होंने वारदात के बारे में पुख्ता जानकारी होने के बाद भी उससे इंकार क्यों किया? क्या उनका मकसद आरोपित को बचाना था या जान-बूझकर घटना को छिपाना था? एक प्रिंसिपल होने के नाते आखिरकार उन्होंने पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया? बच्चों की सुरक्षा के प्रति वे इतनी असंवेदनशील क्यों थीं? आदि सवाल उनसे पूछे गए हैं जिसका जवाब उन्होंने दिया है। डीडी टीम के अलावा संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) ने भी उनसे पूछताछ की थी। इस तरह के वारदात पहले भी हुए हैं लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को क्यों नहीं दी, इस बारे में उनसे विशेष तौर पर पूछताछ हुई है।

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