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उत्तर कोरिया के मंसूबे खतरनाक

आतंकवाद के उन्मूलन के लिए संयुक्त प्रयास पर सहमति बना रहे विश्व के समक्ष इस समय उत्तर कोरिया एक महासंकट के रूप में उपस्थित हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र समेत विश्व के लगभग सभी बड़े देशों के प्रतिबंधों और चेतावनियों को अनदेखा करते हुए तानाशाह किम जोंग उन के नेतृत्व में यह छोटा-सा देश दुनिया के लिए सिर दर्द बनता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को धता बताते हुए एक के बाद एक घातक प्रक्षेपास्त्रों का परीक्षण करने से लेकर अमेरिका जैसे देश को खुलेआम चुनौती देने तक उत्तर कोरिया का रवैया पूरी तरह से उकसावे वाला रहा है। अभी हाल ही में उसने जापान के ऊपर से मिसाइल ही दाग दी थी, जिसके बाद जापान ने अपने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मिसाइल रक्षा प्रणाली की तैनाती कर ली है। उत्तर कोरिया का क्या करना है, इसका कोई ठोस उत्तर फिलहाल विश्व के किसी भी देश के पास नहीं है। अब तक उत्तर कोरिया की इन अराजक गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र और ताकतवर देशों की तरफ से सिवाय जुबानी प्रहार के धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह तो बहुत कुछ रहे हैं, मगर मालूम उन्हें भी होगा कि किम जोंग उन का खात्मा इतना आसान नहीं है। कहा यह भी जा रहा कि अमेरिका ने लादेन को जैसे पाकिस्तान में घुसकर मार गिराया था, वैसे ही किम को भी मार सकता है, लेकिन हमें नहीं भूलना चाहिए कि इन दोनों ही मामलों में भारी अंतर है। लादेन एक आतंकी था, जिसके पास सिवाय कुछ लड़ाकों और पाकिस्तानी हुकूमत के अप्रत्यक्ष सहयोग के कुछ नहीं था। जबकि किम जोंग उन एक देश का राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिनके साथ न केवल लादेन से कहीं अधिक सुरक्षा तंत्र है, बल्कि उनके नियंत्रण में परमाणु हथियारों का जखीरा भी है। ऐसे में, क्या उन्हें लादेन की तरह मार गिराने की कल्पना की जा सकती है ? यकीनन नहीं! यह बात अमेरिका भी बाखूबी समझता है, तभी तो अब तक उसने कोई भी कार्रवाई करने से परहेज किया है। स्पष्ट है कि किम जोंग उन के तानाशाही नेतृत्व में उत्तर कोरिया विश्व के लिए एक घातक यक्ष-प्रश्न बन गया है।

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