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उत्तर भारत के लोगों के भीतर आत्मसम्मान नहीं : राज ठाकरे

नई दिल्ली। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के मुखिया राज ठाकरे ने एक बार फिर से उत्तर भारत के लोगों के खिलाफ विवादित बयान दिया है। राज ठाकर ने कहा कि उत्तर भारत के लोगों में आत्मसम्मान नहीं होता है। एक कार्यक्रम में हिंदी में बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा कि उत्तर भारत के लोगों को मंत्रालय से पूछना चाहिए कि आखिर क्यों उन्हें रोजगार मुहैया नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि आप लोग कितने ही राज्यों में इतनी शर्मिंदगी का सामना कर रहे हैं, आपके भीतर आत्म सम्मान नहीं बचा है, आखिर आप अपने राज्य के नेताओं से क्यों नहीं पूछते कि आपको रोजगार क्यों नहीं दिया गया

आखिर कोई सवार क्यों नहीं पूछता

ठाकरे ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य ने देश को कितने ही प्रधानमंत्री दिए, जिसमे नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। लेकिन आप में से किसी ने यह नहीं पूछा कि आखिर क्यों नहीं पूछा कि आपका राज्य क्यों इतना पिछड़ा है और क्यों लोगों को नौकरी नहीं दी गई। ठाकरे उत्तर भारतीय महा पंचायत द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। ठाकरे ने कहा कि मुंबई में अधिकतर पलायन यूपी, बिहार, झारखंड, झारखंड और बांग्लादेश से होता है। जो लोग यहां आते हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उनके भीतर अपनी भाषा, संस्कृति के लिए कोई सम्मान है।

किसी ने गुजरात पर सवाल नहीं खड़ा किया

राज ठाकरे ने कहा कि जब मैं कोई रुख अपनाता हूं यूपी बिहार के लोगों के खिलाफ हर कोई मेरी आलोचना करता है, लेकिन उसके बाद जिस तरह से गुजरात में बिहार के लोगों पर हमला हुआ, किसी ने भाजपा सरकार पर सवाल खड़ा नहीं किया, किसी ने पीएम से सवाल नहीं पूछा। मैं चाहता हूं कि ये गरीब राज्य भी बेहतर हों, समृद्ध बने। लेकिन अपने नेताओं से सवाल पूछने की बजाए ज्यादातर लोग मुंबई चले आते हैं और शहर पर दबाव डालते हैं।

ट्रेनों में भरकर लोग आते हैं

ठाकरे ने कहा कि कुल 48 ट्रेनें उत्तर भारत से महाराष्ट्र में आती है और यहां से खाली ट्रेनें वापस जाती हैं। हर शहर की एक क्षमता होती है कि वह एक हद तक दूसरे शहर के लोगों को अपने भीतर समाहित कर सके। सोचिए यहां रह रहे लोगों का क्या होगा, स्थिति काफी खराब है। मैं इस बात को समझता हूं कि आप लोगों के पास नौकरी नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र में रह रहे लोगों की स्थिति को भी आप समझिए। इन लोगों के पास नौकरी नहीं है बावजूद इसके कि यहां सभी लोग पढ़े-लिखे हैं।

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