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किराया न बढ़ने से बसों का हाल बेहाल, जान हाथों में लेकर करनी पड़ रही है यात्रा

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कोलकाताःसड़क सुरक्षा सप्ताह के दौरान ही महानगर में एक के बाद दुर्घटनाएं रही है. इन दुर्घटनाआें में कई लोगों की मृत्यु भी हुई हैं. कार्यतः सड़क सुरक्षा सप्ताह दिखावे में बदल गया है. दुर्घटना के कारणों पता लगाने के दौरान बेहाल बसों की बात सामने आयी है. परिचर्चा के अभाव में आधिकांश बसों की हालत ही संगीन है. वर्ष की अधिकता के कारण बसों के परखच्चे भी उखड़ गये हैं. किसी बस के खिड़कियों का शीशा टूटा है तो कही देखरेख की कमी के कारण टायर का हाल बेहाल है. अधिकांश बसों के चारों चक्कों में तीन तो खतरनाक तरीके से रिसोल किये हुए टायर हैं. कई बार रिसोल टायरों में ब्रेक ठीक प्रकार से नहीं पकड़ता. बृहस्पतिवार को खन्ना मोड़ पर घटी दुर्घटना के पीछे मुख्य रूप से रिसोल टायर ही कारण है. पर इतना कुछ होने के बावजूद बस मालिकों को किसी प्रकार का अफसोस नहीं है ऐसाआरोप है. यात्रियों का आरोप है कि जान हथली पर लेकर उन्हें अपने गंतव्य के लिए यातायात करना पड़ता है. इच्छानुसार जिधर तिधर बस यात्री उठाते हैं.इसके बाद अगर पीछे एक ही रूट की कोई आ जाती है तो इसके बाद रस्साकस्सी शुरू होती है. आरोप यह भी है कि अधिकांश बसों के पास सीएफ सर्टिफिकेट नहीं है. बसों का किसी प्रकार से रखरखाव नहीं होता.  इधर बेहाल बसों को लेकर सभी आरोपों का जवाब देने के दौरान सरकार को निजी बस मालिक संगठन के प्रतिनिधियों ने निशाना बनाया है. उनका स्पष्ट कहना है कि गत कई वर्षों से सरकार ने बसों का किराया नहीं बढ़ाया. परंतु गत कई वर्षों में बाजार में सभी चीजें महंगी हुई है. आयेदिन बस चलाना कठिन होता जा रहा है. इस कारण ही बसों का हाल बेहाल है और इसकी संख्या बढ़ रही है. हालांकि इस विषय में राज्य के परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है.  

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