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कुमार स्वामी के लिए आसान नहीं होगा बहुमत साबित करना

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दो पत्नियों के स्वामी और जेडीएस के प्रमुख कुमार स्वामी 23 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री के पद की शपथ लेंगे। इसके बाद 15 दिनों में अपनी सुविधा से विधानसभा में बहुमत साबित करेंगे। कुमार स्वामी के पास 38 विधायक हैं, लेकिन कांग्रेस के 78 विधायकों के समर्थन की वजह से कुमार स्वामी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे हैं।

भाजपा को रोकने के लिए ही कांग्रेस ने अपना हक छोड़ दिया। जानकारों की माने तो कुमार स्वामी के लिए विधानसभा में बहुमत साबित करना आसान नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक मनुसिंघवी, कपिल सिब्बल, राम जेठमलानी, शांति भूषण आदि वकीलों तथा बैंगलूरू में गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत जैसे नेताओं की सक्रियता की वजह से येदुरप्पा गत 19 मई को विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर सके थे, जबकि येदुरप्पा के पास भाजपा के 104 विधायकों का समर्थन था। 

कहा जा रहा है जिस प्रकार येदुरप्पा को 104 विधायकों का समर्थन होने के बाद भी बहुमत नहीं मिला, उसी प्रकार कुमार स्वामी भी विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाएंगें। विधानसभा में बहुमत के लिए 113 विधायकों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस और जेडीएस के विधायकों की संख्या 116 होती है, यानि बहुमत से सिर्फ तीन ज्यादा। 222 विधायकों में से मात्र दो निर्दलीय हैं। निर्दलीय तो कभी भी इधर से उधर हो सकते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण बात तो ये है कि कांग्रेस के 78 विधायकों में से विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं।

कांग्रेस के सभी विधायकों को लगता है कि उन्हीं की वजह से येदुरप्पा बहुमत नहीं दिखा सके। येदुरप्पा ने तो समर्थन देने वाले सभी कांग्रेस विधायकों को मंत्री पद का आॅफर किया था। यही वजह रही कि कांग्रेस के विधायक मंत्री बनना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में जेडीएस के विधायकों की भी है। 21 मई को कुमार स्वामी ने दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की।

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