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केंद्रीय बलों को हटाने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची राज्य सरकार

पहाड़ पर जारी अस्थिर परिस्थिति के बीच वहां तैनात 15 कंपनी केंद्रीय बलों में से 10 कंपनी को वापस हटाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। मंगलवार को राज्य सरकार के महाधिवक्ता किशोर दत्त ने यह याचिका मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में लगाकर जल्द सुनवाई की अपील की है। बताया गया है कि इस पर जल्द ही सुनवाई हो सकती है।
दरअसल शुक्रवार को दार्जिलिंग में गुरुंग को पकड़ने के लिए दबिश देने गई पुलिस टीम पर कथित तौर से गुरुंग गुट के हमले के दौरान एसआई अमिताभ मलिक की मौत के बाद शनिवार को केंद्र सरकार ने पहाड़ से 10 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती को हटाने का फैसला किया है। इससे संबंधित चिट्ठी राज्य सचिवालय नवान्नों को भी भेज दी गई है। इधर केंद्र के फैसले के खिलाफ ममता ने नाराजगी जताई हैं। उन्होंने बताया कि इस फैसले को वापस लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी चिट्ठी लिखी है। उन्होंने दावा किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में वहां से अगर केंद्रीय बलों को हटाया जाता है तो कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती हैं।
इस बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया है कि केंद्रीय जवानों का इस्तेमाल ममता बनर्जी पहाड़ के लोगों पर अत्याचार करने के लिए करती थी। दिलीप घोष ने कहा है कि पहाड़ी लोगों को मारने पीटने उन्हें दबाने के लिए डीएम की मदद से केंद्रीय जवानों का इस्तेमाल ममता बनर्जी करवाती थी और किसी भी तरह की समस्या होने पर आरोप केंद्र पर लगा देती थी। पहाड़ी लोगों के साथ बहुत ज्यादा अत्याचार हुआ है। दिलीप ने दावा किया है कि जब वह पहाड़ पर गए थे तो वहां के स्थानीय लोगों ने उन से विनती की कि यहां से केंद्रीय बलों को हटाया जाए ताकि लोगों पर अत्याचार बंद हों।
इसके बाद ही केंद्र सरकार ने वहां से 10 कंपनी केंद्रीय बलों को हटाया। केंद्र की ओर से कहा गया है कि वर्तमान में पहाड़ की परिस्थिति ठीक है और ऐसे वहां केंद्रीय जवानों की तैनाती का कोई औचित्य नहीं है।

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