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केजरीवाल को मनोज तिवारी की खुली चुनौती

भाजपा छठ को लेकर क्या विशेष कर रही है ?

भाजपा ने दिल्ली में सत्तारूढ़ केजरीवाल सरकार पर छठ पूजा में भी ओछी सियासत करने का आरोप लगाया है। भाजपा के अनुसार आम आदमी पार्टी की ओर से छठ पूजा समितियों पर मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले होर्डिंग लगाने का दबाव डाला जा रहा है। आस्था, विश्वास और प्रकृति की उपासना के महापर्व छठ के पहले दिन भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी ने विशेष बातचीत की।
आप केजरीवाल सरकार पर छठ में राजनीति करने का आरोप क्यों लगा रहे हैं ?
केजरीवाल सरकार न सिर्फ छठ पूजा के कार्यक्रम में राजनीति कर रही है बल्कि बरसों से छठ पूजा में सेवा करती आ रही समितियों का भी अपमान कर रही है। ऐसी भी शिकायतें मिली हैं कि केजरीवाल सरकार छठ समितियों को नजरअंदाज कर पर्दे के पीछे से अपने लोगों को छठ के नाम पर राजनीति करने के लिए नई छठ समितियां गठित कर रही है। छठ पूजा समितियों पर मुख्यमंत्री की तस्वीर वाले होर्डिंग लगाने का दबाव डाला जा रहा है। यहां तक की यमुना में पानी छोड़ने को लेकर केजरीवाल सरकार ने राजनीति की। छठ पूजा को देखते हुए केजरीवाल ने हरियाणा की खट्टर सरकार से पानी छोड़ने का आग्रह तक नहीं किया। ऐसी राजनीति का क्या फायदा जो किसी के प्राण लेकर की जाए। हमारे आग्रह पर 15 मिनट बाद ही हरियाणा सरकार ने अपील मंजूर कर ली और यमुना में अधिक पानी छोड़ने का फैसला ले लिया।
भाजपा छठ को लेकर क्या विशेष कर रही है ?
पूर्वांचल से आकर दिल्ली में बसे करीब 40 लाख से ज्यादा लोग छठ पूजा करते हैं। इसलिए दिल्ली सरकार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उनकी भावनाओं को समझना चाहिए था। दिल्ली सरकार ने एेसा नहीं किया तो छठ समितियों के लोग हमारे पास आए। हमने उनके प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि दिल्ली के तीनों नगर निगम और भाजपा के हजारों कार्यकर्ता छठ पूजा में आने वाली दिक्कतों को दूर करने का हरसंभव प्रयास करेंगे। भाजपा ने व्रत करने वालों के लिए छठ घाट पर शिविर लगाए हैं। पार्षदों और नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि घाटों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं। दक्षिण दिल्ली नगर निगम के पास स्थित घाटों पर प्रकाश की नई व्यवस्था की गई है। उसके लिए नगर निगम की ओर से छठ समितियों को अनुदान राशि 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार किया गया है।
छठ पूजा से क्या नदियों पर कोई प्रभाव पड़ेगा ?
छठ से हमेशा नदियों का फायदा ही होता है। लोग जागरुक होते हैं, तट साफ होता है, छठ में कभी नदियों में कूड़ा नहीं फेंका जाता। अगर केजरीवाल सरकार का सहयोग नहीं मिलता तो लोग खुद ही घाट बनाते, साफ करते। इस पर्व पर लोग घर को सजाते हैं। ये प्रकृति से जोड़ने वाला सूर्य का दिवस है। इस पर्व में नदियों और प्रकृति के संरक्षण का भाव प्रगाढ़ होता है। स्वच्छता के बगैर छठ पूजा संभव ही नहीं है। इसलिए पिछले एक सप्ताह से रात दिन काम कर निगम कर्मचारियों ने छठ घाटों का स्वच्छ स्वरूप तैयार किया है। इसे बरकरार रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

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