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कोलकाता की सड़कों पर किसानों का जमघट

कोलकाता, 29 नवम्बर (हि.स.) । विभिन्न समस्याओं से संबंधित ज्ञापन राज्यपाल को सौंपने के लिए माकपा द्वारा बुधवार को सिंगूर से शुरू किए गए किसानों का मार्च गुरुवार को कोलकाता पहुंच चुका है। सुबह के समय हावड़ा जिले के बाली में ठहरे हजारों किसान हावड़ा ब्रिज से पैदल मार्च करते हुए कोलकाता की सीमा में पहुंचे।

पुलिस ने उन्हें सुरक्षित तरीके से धर्मतल्ला के शहीद मीनार मैदान में पहुंचने के लिए व्यवस्था की है। सड़क किनारे से ये किसान पैदल मार्च करते हुए नारेबाजी कर आगे बढ़ रहे हैं। महाराष्ट्र की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी किसानों को एक करने की जुगत में लगी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की किसान महारैली बुधवार (28 नवम्बर) से शुरू हुई है। यह रैली सिंगूर से शुरू हुई और पैदल मार्च करते हुए देर शाम हावड़ा जिले के बाली में पहुंची।

यहां रास्तेभर करीब 10000 किसान इस रैली में शामिल हुए हैं। रात के समय बाली के विभिन्न इलाकों में किसान स्थानीय लोगों और माकपा कार्यकर्ताओं के घरों में ठहरे थे और गुरुवार सुबह के समय से ही मार्च करते हुए यह लोग कोलकाता पहुंचे हैं। इधर शहीद मीनार मैदान में इस समागम को सफल बनाने के लिए माकपा ने उत्तर और दक्षिण 24 परगना तथा हावड़ा जिले से कम से कम 40000 किसानों को एकत्रित किया है।

इस कार्यक्रम के बाद किसानों के प्रतिनिधि राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और किसानों की समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपेंगे। दरअसल, साल 2019 के आम चुनाव से पहले भाजपा एक ओर रथ यात्रा कर रही हैं तो तृणमूल कांग्रेस ने इसके जवाब में एकता यात्रा उसी रूट से करने की घोषणा कर दी हैै। माकपा भी इस कड़ी में पीछे रहने वाले नहीं है। इन दोनों से पहले 28 नवम्बर को ही माकपा की रैलियों की शुरुआत हो गई। संगठन के किसान मोर्चा “किसान सभा” और अखिल भारतीय कृषि मजदूर यूनियन की ओर से इसका आयोजन किया गया है।

इसमें किसान मोर्चा के अध्यक्ष हन्नाह मोल्ला समेत माकपा के राज्य महासचिव सूर्यकांत मिश्रा, श्यामल चटर्जी, विधायक दल के नेता सुजन चक्रवर्ती समेत दिग्गज नेता संबोधित करेंगे। ‌ साल 2007 में सिंगूर में तत्कालीन विपक्ष की नेत्री ममता बनर्जी ने टाटा की नैनो प्रोजेक्ट भी नहीं लगने दी थी और अब उन्हें जो जमीन दी गई है वह भी आज तक खेती लायक नहीं हो सकी है। किसानों को जमीन देने का दावा तो राज्य सरकार ने किया है लेकिन उसे चरणबद्ध तरीके से विभाजित नहीं किया जा सका है। इसके कारण किसान ना तो खेती कर पा रहे हैं और ना ही उन्हें वापस रोजगार मिलने वाला है। इसीलिए पहली यात्रा यहां से शुरू हुई है। दूसरी यात्रा कूचबिहार और तीसरी नदिया जिले के पलासी से निकाली जाएगी।

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