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कोलकाता में द्वितीय विश्वयुद्ध की स्मृतियों की खोज के लिए हेरिटेज वॉक

कोलकाता,। औपनिवेशिक काल में ब्रिटिश साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर कलकत्ता वर्तमान (कोलकाता) था। अंग्रेजों ने इसे ना केवल अपनी राजधानी बनाई थी बल्कि इससे एशिया के विस्तृत इलाके में अपने प्रभाव और शासन को मजबूत किया था। 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भारत की धरती से ब्रिटेन की फौज ने जापान पर हमला किया था।

उस फौज में भारतीय मूल के सैनिक भी शामिल थे और प्रतिक्रिया स्वरूप जापान के भी बम बर्सक विमानों ने कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बम बरसाए थे। अंग्रेजी हुकूमत की मुकुटमणि माने जाने वाले तत्कालीन कलकत्ता को इससे बहुत अधिक नुकसान तो नहीं हुआ था लेकिन इसके अवशेष और स्मृतियां आज भी महानगर में कहीं-कहीं शेष हैं।

 

इन्हीं पर चर्चा और खोज के लिए आगामी 25 नवंबर को महानगर कोलकाता में हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया है। पुरातत्व विद तथागत नियोगी ने इसका आयोजन कराया है। सोमवार को इस बारे में बताया गया है कि इस दिन सुबह 7:30 बजे न्यू मार्केट के एक नंबर गेट से हेरिटेज वॉक की शुरुआत होगी। इसमें शामिल होने के लिए अधिकतर उन लोगों को आमंत्रित किया गया है जिनका जन्म 1945 के आसपास हुआ था। बड़ी संख्या में इसमें इतिहासविद और पुरातत्ववेता भी शामिल होंगे जो द्वितीय विश्वयुद्ध के समय कलकत्ता की भूमिका और प्रभाव के बारे में जानकारियां साझा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि एक ओर भारत की धरती से फौज ले जाकर अंग्रेजी हुकूमत जापान और अन्य सहयोगी देशों पर हमला कर रही थी तो दूसरी ओर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जापान के प्रधानमंत्री तोजो से मिलकर आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया था और अंग्रेजों की फौज पर हमला किया था। ऐसे में कलकत्ता से इस विश्वयुद्ध की यादें बहुत गहराई से जुड़ी हुई हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस हेरिटेज वॉक में कई रहस्यों पर से पर्दा उठ सकता है।

 

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