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कोलकाता वासियों को पुलिस की नसीहत : पड़ोसी बुजुर्गों का भी रखें ध्यान

कोलकाता।कोलकाता पुलिस लोगों को इस बात के लिए प्रेरित कर रही हैं कि वह अपने आसपास के बुजुर्गों का कम से कम इतना ख्याल जरूर रखें कि उनके जिंदा रहने या मरने की जानकारी ले सकें। सुबह या शाम मॉर्निंग या इवनिंग वॉक के समय कम से कम एक दूसरे का हालचाल पूछे और पड़ोसियों से संपर्क बढ़ाये । 

तकनीक का हाथ पकड़कर तेजी से विकसित होती दुनिया के साथ जीवन जीने का तरीका भी हाईटेक होता जा रहा है। शहरों की बहुमंजिला इमारतों के बीच लोगों के संपर्क भी चार दीवारों के बीच सिमटते जा रहे हैं। एक ही इमारत के भूतल पर रहने वाले व्यक्ति को नहीं पता होता कि उसके ऊपरी तल्ले पर कौन रहता है, पड़ोस की तो बात ही छोड़ दीजिए।

जीवन स्तर में अचानक आए इस बड़े बदलाव का ऐसा असर हुआ है कि आस पड़ोस में रहने वाले लोगों की मौत हो जाने पर भी पड़ोसियों को कानो कान भनक तक नहीं लगती। महानगरों की सूची में शुमार पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक के बाद एक कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैैं जहां लोग अपने मरे हुए परिजनों के शव के साथ कभी महीनों तक तो कभी कई दिनों तक रहते रहे और पड़ोसियों को कानो कान खबर तक नहीं लगी।

जून 2015 में शेक्सपियर सरणी थाना इलाके के मशहूर रॉबिनसन स्ट्रीट कांड का खुलासा होने के बाद पूरी दुनिया में सुर्खियां बनी थी। यहां 47 साल का इंजीनियर पार्थ दे अपने आशियाने को मौत की कोठरी में तब्दील करके रखा था। वह अपनी मरी हुई बहन और कुत्ते के शव के साथ 6 महीने से रह रहा था। जब उसके पिता अरविंद दे ने बाथरूम में खुद को आग लगाकर आत्महत्या की तब जाकर पुलिस को इस पूरे मामले के बारे में जानकारी मिली। उसके बाद एक के बाद एक कई ऐसी घटनाएं सामने आई।

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