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ग्रामीण शौचालयों के निर्माण मामले में प.बंगाल बना एक मॉडल

कोलकाता । ग्रामीण शौचालयों के निर्माण में पश्चिम बंगाल की सफलता के बाद अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कई परियोजनाओं में से एक मिशन निर्मल बांग्ला को देश के लिए एक मॉडल माना जा रहा है।

अन्य राज्यों की 68% से 70% की तुलना में पश्चिम बंगाल के विभिन्न पंचायतों के तहत क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों में 95 प्रतिशत पूर्ण हुआ है। इसके अलावा पंचायत क्षेत्रों में व्यापक जन जागरुकता अभियान चलाया है, जिससे कि यह सुनिश्चित हो सके कि लोग खुले में शौच की आदत पूरी तरह से त्याग दें।

कुछ दिन पहले भी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्य का दौरा किया और कुछ पंचायतों द्वारा इस संबंध में किए गए काम को ध्यान से देखा। वे बहुत प्रभावित हुए और केंद्र सरकार को सौंपी गई उनकी रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की काफी सराहना की गई। राज्य पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि ग्रामीण घरों में शौचालयों के निर्माण का 100 प्रतिशत काम वित्तीय वर्ष (वित्त वर्ष 2018-19) के अंत तक पूरा हो जाएगा।

पश्चिम बंगाल में आठ जिलों को पूरी तरह से खुले शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाया गया है, जबकि और छह जिलें जल्द ही बन जाएंगे। और अब राज्य सरकार के अन्य परियोजनाओं की तरह ही इस परियोजना के तहत घरों में स्थायी शौचालयों के उपयोग के लाभ का प्रचार प्रसारण करने का निर्णय लिया गया है।

लोकप्रसार प्रकल्प के तहत कलाकार ग्रामीण इलाकों में इसका प्रचार-प्रसार करेंगे। विभिन्न प्रकार के लोक गीतों और लोक नृत्यों एवं प्रशिक्षित कलाकार के माध्यम से लोगों को उचित शौचालय की आदतों की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी। हाल ही में हावड़ा जिले के 120 लोक कलाकारों को संदेश देने के लिए प्रशिक्षित किया गया था। 

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