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छठ पूजा 2018: छठ महापर्व के अंतिम अर्घ्य से बदलेगी किस्मत.

छठ के आखिरी दिन यानी की सप्तमी तिथि को सूर्य को अरुण वेला में अंतिम अर्घ्य दिया जाता हैं। यह अर्घ्य सूर्य की पत्नी “ऊषा” को दिया जाता हैं। इस अर्घ्य को देने के साथ ही छठ महापर्व का समापन हो जाता हैंं इस अर्घ्य को देने के बाद महिलाएं जल पीकर और प्रसाद खाकर छठ व्रत का पारायण करती हैं,अगर छठ का अंतिम अर्घ्य भी दे दिया जाय तो भी बहुत सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस बार छठ का अंतिम अर्घ्य 14 नवंबर को दिया जाएगा।

छठ में सूर्य को अंतिम अर्घ्य देने से क्या लाभ प्राप्त होता हैं-

  • छठ का व्रत उपवास रखने से और अर्घ्य देने से संतान की प्राप्ति सरल हो जाती हैं।
  • अगर संतान की ओर से कोई कष्ट हो तो भी यह अर्घ्य लाभकारी होता हैं।
  • जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो, उनके लिए भी यह अर्घ्य लाभकारी होता हैं।
  • अगर राज्यपक्ष से कोई कष्ट हो,तो भी यह उपासना अद्भुत होती हैं।
  • अगर पिता पुत्र के सम्बन्ध ख़राब हो तो भी इस व्रत में अर्घ्य जरूर देना चाहिए।

छठ व्रत की समाप्ति के नियम और सावधानियां-

  • छठ व्रत की समाप्ति नीम्बू पानी पीकर ही करें।
  • एकदम से अनाज और भारी खाना नहीं खाएं।
  • अंतिम अर्घ्य के बाद उपस्थित सभी लोगों को प्रसाद जरूर दें।

सूर्य के अंतिम दिन के अर्घ्य से किस प्रकार मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं-

  • शिक्षा और एकाग्रता के लिए
  • जल में नीला या हरा रंग मिलाएं
  • स्वास्थ्य और ऊर्जा के लिए-रोली और लाल पुष्प
  • राजकीय सेवा के लिए- जल में लाल चन्दन मिलाएं

शीघ्र विवाह और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए- हल्दी मिलाकर

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