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जन-धन योजना बनती जा रही परेशानी योजना

नई दिल्ली। गरीबों के जीवन को सहज बनाने के लिए जन-धन योजना के तहत खोले गये बैंक खाते अब उनके लिए परेशानी का सबब बनने लगे हैं। चाहे सीधे बैंक से या डेबिट कार्ड से एक माह में चार बार रकम निकाले जाने के बाद खाता ब्लाक कर दिया जा रहा है। भले ही गरीब खाता धारक ने चार बार में पांच सौ या एक हजार रुपये ही क्यों न निकाले हों।

निजी बैंक तो एक कदम आगे बढ़कर ऐसे खाताधारकों के जन-धन योजना वाले खाते को बचत खाता में बदल दे रहे हैं और उनके सभी लेन-देन पर चार्ज वसूलने लगे हैं।

मालूम हो कि गरीबों की दशा-दिशा सुधारने, उनको गुल्लक के बजाय बैंकों से जोड़ने, देश के बैंक खाते बढ़ाने, ट्रांजेक्शन बढ़ाने, देश में बढ़ती आमदनी दिखाने, सूदखोरों के चंगुल से गरीबों को बचाने के लिए उनको 5000 रुपये तक का ओवरड्राफ्ट ऋण देने, उनको बीमारी में 3000 हजार रुपये तक मदद और 1 लाख रुपये की दुर्घटना बीमा जैसी सुविधा मुहैया कराने के लिए जन-धन योजना की घोषणा 15 अगस्त 2014 को और शुभारंभ 28 अगस्त 2014 को किया गया।

बैंकों को राष्ट्रीय प्राथमिकता के तौर पर हर परिवार का एक बैंक खाता खोलने का निर्देश दिया गया। ऐसे परिवारों के जल्दी से जल्दी साढ़े सात करोड़ बैंक खाते खोलने का लक्ष्य रका गया। इसके लिए जीरो बैलेंस वाला भी खाता खोलने का निर्देश हुआ।

जन-धन योजना के तहत खोले गए बैंक खाते के मार्फत गरीबों को डेबिट कार्ड और किसान कार्ड की सुविधा भी दी गई। जन-धन योजना के तहत खुले बैंक खाता में मनरेगा व अन्य तमाम सरकारी योजनाओं में किये कार्य की मजदूरी भुगतान के लिए उपयोग किया जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का दावा किया जा रहा है लेकिन इन खातों से एक माह में 4 बार ट्रांजक्शन होने पर खाता ब्लाक हो जाता है। अब ग्राहक अगले माह ही अपने खाता से रकम निकाल सकता है। 

कई ग्राहकों का कहना है कि घर में जब कोई जरूरत पड़ती है तो बैंक से 100 या 200 रुपये निकाल कर काम करते हैं। ऐसे में चार बार पैसा निकाल लेने पर बैंक वाले पैसा नहीं दे रहे हैं। बैंक वाले कह रहे हैं कि नियम के अनुसार एक माह में चार बार ही पैसा निकाल सकते हैं। अब अगले माह निकालना।

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