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जब भैंस ने खाया गरमा गरम दम बिरयानी

कोलकाताः हांडी के बस पल भर पहले ही दुकान के सामने लाकर रखा गया था. उसके ढक्कन को थोड़ा खोल कर रखा गया था. उस कारण पूरा क्षेत्र सुंगध से गमगमा रहा था. हालत ऐसी थी कि नाक में सुगंध आते ही मानों पेट में चूहे कूदने लगते हो. हो सकता है कि वह  खुशबू उसके नाक तक भी पहुंची हो. भले ही कभी न खाया तो क्या हुए एक बार तो खा कर स्वाद लिया ही जा सकता है. कुछ इसी प्रकार बिरयानी के दुकान में आगमन भी हुआ. पर तंदरूस्त धूमल भैंस को देख कर पूरा दुकान खाली हो गया. बिरयानी परोसना को दूर, जान हथेली पर लेकर वहां से खिसकने में ही वे व्यस्त दिखे.अतिथि का स्वागत करने में कमी देख भैंस भी गुस्से लाल पीला हो गया. बिरयानी की हांडी उलट, चेयर-कुर्सियों को उलट उसने अपना गुस्सा भी जाहिर किया. अशोक नगर के गुमा के चूड़ीपाड़ा स्थित उक्त दुकान के पास तब तक यह दृश्य देखने के लिए भीड़ जुटने लगी थी.यह सब देख कर दुकानदार अति क्रुद्ध हो रहा था. पर वह विवश था कुछ भी नहीं कर सकता था. डर के मारे छाती धब-धब कर रही थी. बाधा देने जाने पर कहीं अतिथि देव भवः न हो जाए. दूसरी ओर भैस बाबाजी के बिरायनी खाने की घटना को देखने के लिए दुकान के आसपास काफी भीड़ इकट्ठा हो गयी थी. भय के मारे कोई आड़ से यह दृश्य देख रहा था. शाकाहारी प्राणी को इस प्रकार बिरयानी चाव से खाते देख कर लोग भी आश्‍चर्य चकित रह गये. उपस्थित जनता को विश्‍वास ही नहीं हो रहा था. बिरयानी खाने के बाद अतिथि को घर लौटने की इच्छा नहीं थी. इसके बाद वन विभाग को इसकी जानकारी दी गयी. तुरंत स्थानीय थाने में भी फोन किया गया. कुछ मिनट के भीतर ही दोनों पक्ष वहां उपस्थित हुए। पर वहां भी समस्या पैदा हो गयी. भैंस को बिरयानी से अलग करने को लेकर पुलिस और वन विभाग के कर्मियों में विवाद पैदा हो गयी. परिस्थिति पर कौन नियंत्रण करेगा इसको लेकर काफी देर तक वाद विवाद चला. आखिरकार दुकान का शटर गिरा दिया गया. काफी देर तक दुकान में अतिथि भैंस महारात को रोक कर रखा गया. चार घंटो तक अतिथि देव को वश में करने को लेकर जद्दोजहद चलती रही. पर उसे वश में करने में ठंड के दिन में पुलिस और वनकर्मियों के पसीने निकल गये. आखिरकार गले में रस्सी डाल कर उसे बाहर निकाला गया.शाम से घटना रात हो गयी. पर तब तक लोगों की भीड़ वहीं जुटी हुई थी. ऐसा बिरयानी खाने वाला भैंसा तो आसानी से देखने को नहीं मिलता. यही कारण था कि इस लम्हे को कोई भी जाने नहीं देना चाहते थे.

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