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जिस्मफरोशी के धंधे में केरल हुआ डिजिटल

तिरुवनंतपुरम। देश का सबसे साक्षर राज्य केरल है, ऐसे में यहां लोगों का जनजीवन अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है। लेकिन जिस तरह से यहां जिस्मफरोशी के धंधे में डिजिटल पेमेंट का मामला सामने आया है उसने साफ कर दिया है कि अब डिजिटल सुविधा का लाभ अपराध को बढ़ावा देने के लिए भी हो रहा है। केरला स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य में जिस्मफरोशी के धंधे में पैसों के लेन देन के लिए व्हाट्सएप सहित अन्य ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ऑनलाइन होता है सबकुछ तय

केएसएसीएस ने कुछ एनजीओ के साथ मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है जिसमे यह बात सामने आई है कि जिस्मफरोशी के लिए लोगों को व्हाट्सएप से मैसेज किया जाता है और उनसे मिलने के लिए समय और जगह तय किया जाता है। संस्था के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर रमेश का कहना है कि हम लगातार इन लोगों से मिलते हैं और उन्हे मेडिकल चेकअप देते हैं ताकि यौन संबंध से होने वाली बीमारियों पर रोक लगाई जा सके।

गरीब परिवार के लोग अधिक

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर महिलाएं जो जिस्मफरोशी के धंधे में लिप्त हैं वह गरीब घरों से ताल्लुक रखती हैं। लेकिन इस धंधे में कई ऐसे लोग भी हैं जोकि बड़े परिवार से आते हैं और उन्होंने पैसे के लिए इस धंधे को अपनाया है। वहीं इस धंधे में तीसरी श्रेणी भी है, जिसमे वो लोग हैं जिन्हे लग्जरी लाइफ चाहिए और इस चाहत में वह इस धंधे में आते हैं और तकनीक इनके लिए काफी कारगर काम करती है। तकनीक की मदद से इन्हें पैसों के लेन-देन और मिलने की जगह निर्धारित करने में कोई दिक्कत नहीं होती है।

पैसों और आलीशान लाइफ के लिए करते हैं धंधा

इस धंधे से जुड़े दूसरी श्रेणी के वो लोग हैं जो पार्ट टाइम नौकरी करते हैं और ये लोग इस धंधे से इसलिए जुड़ते हैं क्योंकि इन्हे पैसों की और जरूरत होती है। जबकि तीसरी श्रेणी के लोग तकनीक के माध्यम से इस धंधे में उतरते हैं और आलीशान जीवन जीने के लिए वह यह सब करते हैं। केएसएसीएस के डायरेक्टर रमेश का कहना है कि हम इन लोगों को जागरूकता अभियान के तहत यौन संबंध से जुड़ी बीमारियों के बारे में अवगत कराते हैं।

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