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….तो सिंह की सवारी छोड़ कन्याश्री की साईकिल पर आयेंगी मां दुर्गा : दिलीप घोष

कोर्ट के फैसलों का सरे आम अपमान करने का लगाया आरोप

कोलकाताः राज्य की मुख्यमंत्री द्वारा एकादशी के दिन विसर्जन न करने के दिये गये निर्देशों को लेकर काफी कुछ गुजर गया है. यह बात कोर्ट तक पहुंची. कोर्ट में भी राज्य सरकार को हार का समाना करना पड़ा. पर सरकार है कि अपनी हार को स्वीकार नहीं करना चाहती. अब तो हाईकोर्ट के फैसले पर राज्य सरकार जिस प्रकार का दांव खेला है वह सीधेतौर पर कोर्ट की अनदेखी है. दुर्गापूज संविधान और परंपरा के अनुसार होती है. पर राज्य में जिस प्रकार की स्थिति बना रही है. उसके मुताबिक यही लगता है कि अगले वर्ष मां दुर्गा को धरती पर आने के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति लेनी होगी.उसके बाद ममता बनर्जी कहेंगी कि मां दुर्गा की सवारी शेर हिंसा का प्रतीक है. मां दुर्गा को अपनी सवारी के स्थान पर कन्याश्री परियोजना में बांटी गयी साइकिल पर सवार होकर आना पड़ेगा. उक्त बातें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने शनिवार को प्रदेश कार्यालय में संवाददातआें को संबोधित करते हुए कहा. उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के हाथों में भी हथियार होते हैं. इस पर वे कहेंगी कि हथियारों के स्थान पर राज्य में उनके द्वारा शुरु की गयी परियोजनाआें का कट आउट होनी चाहिए. अस्त्र पूजा पर उन्होंने कहा कि हथियारों की पूजा सदियों से होती आ रही है. प्रचीन काल में पशुआें की बलि चढ़ाने से पहले हथीयारों की पूजा जाता था. वह प्रथा अब नहीं रही पर आज भी पशुआें के स्थान पर सब्जियों की बलि दी जाती है. उन्होंने कहा कि राज्य में घटिया किस्म की राजनीति हो रही है. धर्म के आधिकारों को छीना जा रहा है. जिस प्रकार कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी हो रही है उससे यही लगता है कि कोर्ट का कोई अस्तित्व ही नहीं है. एक प्रश्‍न के जवाब में दिलीप घोष ने एकादशी को कोई विसर्जन न करे इसके लिए धमकाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि जानबुझ कर मुख्यमंत्री ने विसर्जन मुद्दे को उठाया है. दिलीप घोष ने कहा कि राज्य की धरती आपराधिक तत्वों के लिए पनाहगार बन गया है. यहां आसामाजिक क्रियाकलापों को अंजाम देने वाले लोग सेंटर लेते हैं, हालियां उदाहरण इन दावों को साबित करते हैं. कार्रवाई करने कर सरकार में शामिल नेता उतर कर इसका विरोध करते हैं.

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