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देश को गुलाम बना रही है केंद्र सरकार : ममता

कोलकाता,। देशभर में मौजूद सभी कंप्यूटरों में से किसी पर भी जनरेट होने वाले तमाम तरह के तथ्यों पर निगरानी रखने संबंधी गृह विभाग की ओर से जारी की गई अधिसूचना को केंद्र पर ममता बनर्जी ने शुक्रवार शाम केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि वर्तमान केंद्र सरकार देश को गुलाम बना रही है।

सुबह के समय उन्होंने इस मामले पर ट्वीट किया ही था, शाम के समय वे पार्क स्ट्रीट के एलेन पार्क में क्रिसमस उत्सव का उद्घाटन करने पहुंची थी। इस दौरान क्रिसमस उत्सव का उद्घाटन करने के बाद वे चंद मिनट के लिए क्रिसमस और राज्य सरकार के आयोजन के बारे में जरूर बोलीं लेकिन उसके बाद लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर रहीं। उन्होंने गृह विभाग की ओर से जारी की गई अधिसूचना का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र की सरकार लोगों के व्यक्तिगत कंप्यूटर पर निगरानी रखने की कोशिश कर रही है।

यह लोगों को गुलाम बनाने जैसा है। लोग अपने व्यक्तिगत फाइल्स अथवा कारोबार से संबंधित चीजें कहां रखेंगे? अब केंद्र सरकार उस पर भी निगरानी रखना चाहती है। इस अधिसूचना को तुरंत वापस लेना होगा।

गुरुवार को गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देशिका के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस, डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, सीबीआई, एनआईए, डायरेक्टरेट ऑफ सिग्नल इंटेलिजेंस समेत दिल्ली पुलिस कमिश्नर देशभर के किसी भी कंप्यूटर पर निगरानी रख सकते हैं। उस कंप्यूटर में क्या कुछ रखा गया है, क्या कुछ भेजा जा रहा है, उसका क्या इस्तेमाल होता है आदि की निगरानी का अधिकार इन सभी केंद्रीय एजेंसियों को को दिया गया है।

इसे लेकर ममता बनर्जी ने पार्क स्ट्रीट के कार्यक्रम से केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मैं चिंतित हूं कि व्यक्तिगत कंप्यूटर पर इस तरह से निगरानी रख कर आखिरकार केंद्र सरकार क्या करना चाहती है। लोग अपने व्यक्तिगत फोटो या अन्य चीजें कहां रखेंगे? व्यापार से संबंधित कई ऐसी जानकारियां होती हैं जो गोपनीय होनी चाहिए। उस पर भी अब केंद्र सरकार निगरानी रखेगी। इससे लोगों की स्वाधीनता खत्म हो जाएगी। देश को गुलाम बनाने की कोशिश की जा रही है।

इस मामले को लेकर शुक्रवार को संसद में भी काफी हंगामा हुआ था। राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने सरकार के इस फैसले की आलोचना की थी। इस पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में दावा किया है कि मनमोहन सिंह के समय में ही कांग्रेस की सरकार ने यह निर्णय लिया था। जेटली के इस बयान का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि अरुण जेटली इस मामले पर झूठ बोल रहे हैं।

2009 में परिस्थिति अलग थी और आज हमें गुलाम बनाया जा रहा है। इधर ममता के इस भाषण से पहले राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से इस बारे में एक बयान जारी किया गया था जिसमें लिखा गया था कि 2009 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने केंद्रीय और राज्य गृह विभाग के सचिवों को ऐसी निगरानी का अधिकार दिया था। गृह विभाग के सचिव की अनुमति से आईजी रैंक के अधिकारी इसकी निगरानी कर सकते थे लेकिन वर्तमान सरकार ने 10 केंद्रीय एजेंसियों को इस के लिए छूट दी है जो चिंता का विषय है। ममता ने भी अपने बयान में इस बात का जिक्र किया और इस अधिसूचना को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।

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