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पंचायत मनोनयन को लेकर कई जिलों में संघर्ष

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कोलकाताःपंचायत चुनाव के मनोनयन पत्र दाखिल करने को लेकर राज्य के कुछ स्थानों पर संघर्ष की छिटपुट घटनाएं घटी है. जिसको लेकर चुनाव आयुक्त अमरेंद्र कुमार सिंह को राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने तलब किया है. इस घटना में राज्यपाल के राजनीतिक निरपेक्षता को लेकर तृणमूल के पार्थ चटर्जी ने सवाल उठाया है.

उन्होंने कहा कि राज्यपाल चाहते हैं कि केंद्रीय बल आये, वे भाजपा के आरोपों को ही सुन रहे हैं. इस परिस्थिति में राज्य के लोगों के मन में राज्यपाल की निरपेक्षता के लेकर ही प्रश्‍न उठ रहे हैं. मनोनयन जमा देने को लेकर राज्य के विभिन्न इलाके में हिंसा हो रही है. दूसरे दिन भी बीरभूम, मुर्शिदाबाद, हुलगी के आरामबाग से संघर्ष की खबरें आयी. इस परिस्थिति में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जो बयान दिया वह आग में घी डालने जैसा ही था.

दिलीप घोष ने कहा कि दलबल के साथ मनोनयन पत्र जमा करेंगे. पंचायत चुनाव में मार का बदला मार से हम देंगे. दिलीप घोष यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि प्रत्येक बार ७०-८० लोग श्मशान जाते हैं, इस बार भी ऐसा ही होगा.राज्य में प्रमुख विरोधी के तौर पर भाजपा ऊभर रही है. मनोनयन जमा देने के पहले ही दिन से भाजपा-तृणमूल संघर्ष की खबरें राज्य के विभिन्न जिलों से आ रही है. ऐसे में दिलीप घोष का यह बयान उत्तेजना को और बढ़ा सकता है.

ऐसा राजनीतिक जानकारों का मानना है. दूसरी ओर भाजपा पर सुब्रत मंडल ने कटाक्ष किया है. उन्होंने कहा कि बीरभूम शांत वातावरण को भाजपा नष्ट कर रही है. उन्होंने कहा कि बीरभूम में भाजपा के पैरों तले से माटी खिसक गयी है. यहां हिन्दू मुसलमान की राजनीति नहीं होती. भाजपा कर्मियों की पिटाई के बारे में उन्होंने कटाक्ष किया कि एक व्यक्ति ठोकर खाकर गिर गये, और उठ कर कह रहे हैं के छूरी मार रहे हैं.   

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