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पूजा शुरू होने से पहले संकल्प क्यों किया जाता हैं,

जयपुर। हिन्दू धर्म में आस्था को बहुत महत्व दिया जाता है। इसलिए घर में सुबह शाम पूजा करने दिया जलाने की परंपरा हैं। इसके साथ ही पूजा पाठ से पहले संकल्प किया जाता है। संकल्प कर की गई पूजा सफल होती है। संकल्प पूजा विधि का एक अनिवार्य अंग माना जाता है। संकल्प कर पूजा करने की सही विधि-विधान है। पूजा करने से पहले संकल्प कर पूजा करने का मांगलिक प्रभाव पड़ता है।

हिन्दू धर्म में पूजा से पहले संकल्प आवश्यक माना जाता है, पूजा से पहले अगर संकल्प ना लिया जाए तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। मान्यता है कि संकल्प के बिना की गई पूजा का सारा फल इन्द्र को प्राप्त हो जाता है। इसीलिए शास्त्रों में माना जाता है कि प्रतिदिन की पूजा से पहले संकल्प लेना जरुरी है, उसके बाद पूजन शुरु करें।

शास्त्रों के संकल्प का अर्थ है कि इष्टदेव और स्वयं को साक्षी मानकर संकल्प लिया जाता है कि हम जो भी पूजा कर रहें हैं उसको अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए किया जाता हैं और इस पूजन को पूर्ण अवश्य करेंगे।

संकल्प लेने के लिए सबसे पहले हाथ में जल लेकर पूरी सृष्टि के पंचमहाभूतों (अग्रि, पृथ्वी, आकाश, वायु और जल) में भगवान गणपति जल तत्व के अधिपति हैं। इसीलिए गणेश को सामने रखकर संकल्प लिया जाता है। जिससे गणेश जी की कृपा से पूजन कार्य निर्विघ्न संपन्न हो सकें। एक बार पूजन का संकल्प लेने के बाद उस पूजा को पूरा करना आवश्यक होता है। 

 

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