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बंगाल में छह हजार मदरसा में दस प्रतिशत मदरसों पर खुफिया नजर!

पश्‍चिम बंगाल में एक के बाद एक हिंसा की हुई घटनाओं को लेकर अब बंगाल के मदरसों पर केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी खुफिया नजर रखने की तैयारी शुरू कर दी है

पश्‍चिम बंगाल में एक के बाद एक हिंसा की हुई घटनाओं को लेकर अब बंगाल के मदरसों पर केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी खुफिया नजर रखने की तैयारी शुरू कर दी है. इसे लेकर केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी ऐसे मदरसों की तालिका तैयार कर रही है. हावड़ा के धुलागढ़ से लेकर उत्तरी 24 परगना जिले के बादुरिया तक सांप्रदायिक हिंसा की घटना को लेकर इन दिनों बंगाल के छह हजार मदरसों में से दस प्रतिशत मदरसों पर विशेष नजरदारी रखने की तैयारी शुरू कर दी गई है. बादुरिया में एक युवक द्वारा फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर दो समुदायों के सदस्यों के बीच झड़पें हुयी थी इसमें एक की मौत हो गई थी. यहीं नहीं हावड़ा के धुलागढ़ के साथ ही कांकीनाड़ा में भी हिसां हुई थी. मालदह के कलियाचक और  पुरुलिया में भी साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुई. इन घटनाआें के पीछे कहीं न कहीं अप्रत्यक्ष रूप से आतंकी संगठन द्वारा कुछ मदरसों का अवैध तरीके से इस्तेमाल कर आम लोगों के मन में  भड़काउ विचारधारा पैदा करने में अहम भूमिका निभाने का संदेह जताया गया है.

केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक बांग्लादेश के आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन द्वारा  अधिकांश मदरसों का गलत तरीके से आतंकी घटनाआें को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे है. इसे लेकर ऐसे मदरसों की तालिका तैयार की जा रही है. खासकर आम लोगों के बीच हिंसात्मक विचार फैलाकर कई घटनाआें को अंजाम दिया गया है. बसीरहाट के घोरारस औऱ खोलापटा के साथ-साथ बादुरिया के कई मदरसा फिलहाल इस तालिका सूची में शामिल किए गए है. सूत्रों के मुताबिक  पश्‍चिम बंगाल में सब मिलाकर  छह हजार मदरसा है. इनमें से दस प्रतिशत मदरसा सरकार की नजरदारी से बाहर है औऱ ऐसे मदरसों पर ही खासकर नजरदारी रखने की तैयारी की गई है. इनमें अधिकांश मदरसों में अवैध तरीके से गलत मंशा से काम किए जाते हैं. इन सभी मदरसों पर विशेष नजरदारी रखने की तैयारी की जा रही है.

मालूम हो कि 2014 में बर्दवान के खागड़ागढ में हुए विस्फोट की घटना के बाद पता चला कि बांग्लादेश का आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन (जेएमबी) संगठन कुछ मदरसों के जरिए अपने मंशूबे को पूरा करने में लगे थे.  कोलकाता के कई जगहों पर भी हमले की साजिश थी. यहीं नहीं जांच में यह भी सामने आया था कि एक मदरसा को आतंकी संगठन सेफ गार्ड के तौर पर इस्तेमाल कर रहे थे. यहां तक की आतंकी संगठन के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में पता चला था कि वह मदरसा  स्कूल का ही शिक्षक बन बैठा था.  2002 में ही पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा कुछ अवैध मदरसों के खिलाफ आवाज उठाया गया था जिसके बाद अवैध मदरसों को बंद कर दिया गया था. लेकिन सरकार बदलने के बाद फिर मदरसों की संख्या काफी तेजी से बढ़ती चली गई. हालांकि इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस के नेता सिद्धिकुल्ला चौधरी का कहना है कि एक दो मदरसा में इस तरह के कारनामे सामने आने की वजह से सारे मदरसा को बंद नहीं किया जा सकता है और ना ही सारे मदरसा पर सवाल उठाया जा सकता है. मदरसा में छोटे-छोटे बच्चों को उन्हें शिक्षा के साथ-साथ उनके धर्म के बारे में बताया जाता है.

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