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बंगाल : हर तीन महीने पर प्रदेश भाजपा के कार्यों की समीक्षा करेंगे अमित शाह

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कोलकाता। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमिफाइनल माने जाने वाले पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनाव में भारी सफलता से उत्साहित भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अब राज्य में हर तीन महीने पर समीक्षा बैठक करेंगे। पार्टी सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की गई है।

बताया गया है कि सांगठनिक स्तर पर पार्टी के कार्यों को लागू करवाने व बंगाल के दुर्ग पर कब्जा के लिए अमित शाह ने विशेष रणनीति बनाई है। राज्य में प्रत्येक बूथ पर कम से कम 10 सक्रिय कार्यकर्ता तैयार करने व आम लोगों के बीच ममता सरकार के खिलाफ जनभावना तैयार करने की जिम्मेवारी उन्होंने राज्य नेतृत्व को काफी पहले दी थी।

माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के पहले इसे हर हाल में सफल करने के लिए अमित शाह ने स्वयं कमान संभाली है। उन्होंने पार्टी नेताओं को जानकारी दी है कि हर तीन महीने में वे बंगाल आएंगे और जमीनी स्तर पर पार्टी की मजबूती व कार्यों की प्रगित रिपोर्ट लेंगे। जरूरत पड़ने पर वे आवश्यक निर्देश भी देंगे व हर हाल में 2019 से पहले बंगाल में मजबूत विपक्ष के रूप में उभरने की रणनीति को सफल बनाएंगे। 

 

यह भी दावा किया जा रहा है कि समीक्षा सभाओं के लिए वे हमेशा पश्चिम बंगाल नहीं आ सकते हैं, लेकिन वह राज्य नेतृत्व को दिल्ली में बुला सकते हैं या वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा मीटिंग आयोजित कर सकते हैं। शाह ने पिछले साल 2019 में 42 लोकसभा सीटों में से 22 जीतने के लिए बंगाल भाजपा के लिए लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन पंचायत चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन और महेशतला विधानसभा चुनाव के बाद 10 सीटें और जीतने का लक्ष्य रखा है। दोनों चुनाव में भाजपा ने माकपा व कांग्रेस को पीछे छोड़कर राज्यभर में मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में भाजपा के विकास के पूरे अभियान की निगरानी अमित शाह ने की है। हमने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के काम को लोकप्रिय बनाने और लोगों के बीच पहुंचने के लिए बूथ-वार दृष्टिकोण और द्वार-द्वार अभियान को अपनाने के शाह के निर्देशों का पालन करके भारी वृद्धि दर्ज की है।’

राज्य की सत्ता पर आसीन तृणमूल के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि पंचायत चुनावों में राज्य के पश्चिमी जिलों में भाजपा के प्रदर्शन के बाद पार्टी नेतृत्व चिंतित था। पंचायत चुनावों में झारग्राम जिले के ग्रामीण हिस्सों में भाजपा की बढ़त के बाद टीएमसी ने पार्टी के ब्लॉक-स्तर के नेताओं और जिला प्रशासन के एक वर्ग को स्थानांतरित कर दिया और बदल दिया। अब अगर शाह ने बूथ स्तर पर पार्टी की मजबूती की ओर ध्यान दिया है तो निश्चित तौर पर यह तृणमूल के लिए बड़ी चुनौती होगी। 

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