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बच्चों को चिड़चिड़ेपन से रखना है दूर

जयपुर । आज कल बच्चों में देखा गया है की वह बहुत ज्यादा ही बदतमीज ,  झगड़ालू ,हो गए हैं । ना किसी की सुनते हैं ना ही उनको किसी की परवाह होती है । इतना ही नही ज़्यादातर बच्चे अपनी बात मनवाने के लिए माँ बाप को ब्लेकमेल करना भी सीख जाते हैं । कई कई बच्चे तो ऐसे भी हैं जो ना जगह देखते हैं ना माहौल उनका बर्ताव माँ बाप के साथ ही नही हमारे बड़े बुजुर्गों और साथ ही दूसरे लोगों के लिए भी बहुत ही ज्यादा खराब हो जाता है । ऐसे में उनको इस स्थिति से बचना ब्वाहुत ही ज्यादा जरूरी है । आइये जानते हैं क्या करें अपने बच्चों को इस परिस्थिति से बचाने के लिए ।

लगातार मारने-डांटने पर बच्चे के मन में आपके प्रति गुस्सा घर कर जाता है, जो धीरे-धीरे चिड़चिड़ेपन में बदल जाता है। इसलिए बच्चे को कभी भी मारना नहीं चाहिए। अगर बच्चा परेशान कर रहा है, तो उसकी बात सुनें और परेशानी दूर करने की कोशिश करें।

कई बार मां-बाप गलती करने पर बच्चे को समझाने के बजाय उसे दूसरों के सामने डांटने-चिल्लाने लगते हैं। आमतौर पर 3-4 साल की उम्र तक बच्चों में आत्मसम्मान की भावना का विकास हो जाता है। ऐसे में बच्चों को दूसरों के सामने डांटने-चिल्लाने से बच्चे के दिल को ठेस पहुंचती है और उसमें बदले की भावना घर करने लगती है। ऐसे बच्चे स्वभाव से चिड़चिड़े हो जाते हैं ।

बहुत ज्यादा गुस्‍सा करने वाले बच्‍चों को ज्‍यादा से ज्‍यादा खेलकूद और बाहरी गतिविधियों में व्‍यस्‍त रखना जरूरी होता है। बच्चे को डांस या आर्ट क्लास में भेज सकते हैं। समय-समय पर उन्हें आउटडोर गेम्स खेलने के लिए बाहर ले जाना भी अच्छा रहता है ।

 

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