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भाजपा और ममता में पुरानी सांठगांठ : कांग्रेस

कोलकाता। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा ने  दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस में लंबे समय से सांठगांठ रही है और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का हालिया बयान इसका ताजा सबूत है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया था कि देश में अब एक बंगाली प्रधानमंत्री की जरूरत है और ममता बनर्जी की संभावना इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। उनके इस बयान के बाद राज्य भर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी।

 मीडिया से मुखातिब हुए सोमेन मित्रा ने कहा कि दिलीप घोष का यह बयान यह स्पष्ट करता है कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और राज्य की ममता बनर्जी सरकार में मौन सांठगांठ लंबे समय से रहा है। इसका दूसरा सबूत यह भी है कि केंद्र के खिलाफ जब सभी श्रमिक संगठन हड़ताल कर रहे हैं तब ममता बनर्जी इसे विफल करने में जुट गई है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस लंबे समय से कहती रही है कि दोनों पार्टियों के बीच आपसी सांठगांठ रही है और अब यह खुलकर सामने आ चुके हैं। दिलीप घोष का ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री बनाने की वकालत इसी सांठगांठ का प्रतिबिंब है। 

हालांकि शनिवार को ममता बनर्जी के जन्मदिन के दिन दिए अपने बयान से  दिलीप घोष ने यू-टर्न ले लिया था और कहा था कि उन्होंने मजाक किया था। इस पर भी व्यंग करते हुए सोमेन मित्रा ने कहा कि राज्य के लोग दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक समझौते को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। दिलीप घोष इसे छिपाने के लिए जो बहाना कर रहे हैं वह अब चलने वाला नहीं है।

मित्रा ने दावा किया कि घोष ने बयान देकर यह स्वीकार किया है कि भाजपा 2019 के लोकसभा चुनावों में सत्ता में नहीं लौटेगी और ऐसे में ममता बनर्जी को समर्थन दे सकती है। 8 और 9 जनवरी को विभिन्न वामपंथी ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत आम हड़ताल पर टिप्पणी करते हुए मित्रा ने कहा कि हड़ताल के आह्वान पर टीएमसी का विरोध राज्य में ‘टीएमसी-बीजेपी तय मुद्दों’ का एक और उदाहरण है।

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