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ममता बनर्जी यह पार्टी बनाना नहीं चाहती थी : शिखा बनर्जी

कोलकाताः  दीदी (ममता बनजी) ने जिन आदर्शों को लेकर पार्टी का निर्माण किया था उस पार्टी को विभिन्न राजनीतिक दलों से आने वाले लोग गंदा कर रहे हैं. रुपये के नशे में वे पार्टी के नाम मात्र से तृणमूल कांग्रेस के कलंकित कर रहे हैं. उनकी सहायता पार्टी के नेता व  मंत्री कर रहे हैं. पार्टी व पंचायत समिति से इस्तीफा देने के बाद उक्त बातें डाबग्राम फुलबाड़ी के लोकप्रिय तृणमूल नेत्री तथा राजगंज पंचायत समिति के पूर्त प्रबंधक शिखा चटर्जी ने कही. प्रत्यक्षरूप से न होने के बावजूद बृहस्पतिवार को दल बल के साथ भाजपा में शामिल होने का इशारा भी किया. ऐसी ही खबर है. बुधवार को शारीरिक कारण दिखा कर राजगंज के बीडियो के शिखा ने अपना इस्तीफा भेजा. चिट्ठी की वह कांपी पंचायत समिति के अध्यक्ष व तृणमूल के जिला अध्यक्ष को भी उन्होंने पहुंचाया है. परंतु पर्यटन मंत्री गौतम देव के विधानसभा केंद्र के डाबग्राम व फुलबाड़ी इलाके की यह हेवीनेट तृणमूल नेत्री आखिर पार्टी क्यों छोड़ रही है. पार्टी के अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ने वाले पुराने नेता को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया है. अनेकों का कहना है कि इस इलाके में तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव का विस्तानर में मुख्य भूमिका इस नेत्री ने ली थी. तृणमूल कांग्रेस के शुरुआती दौर से नेत्री ममता बनर्जी की प्रेरणा से पार्टी को इलाके में उन्होंने पहचान करायी थी. तृणमूल कांग्रेस के सत्ता  में आने दे बाद विभिन्न पार्टियों से तृणमूल में   काफी लोगों को शामिल करवाया गया  इनमें से अधिकांश ही जमीन माफिया या जमीन के दलाल हैं ऐसा उनका  आरोप है. नये लोगों के आने के बाद प्रवीण नेतृत्व को कोई महत्व भी नहीं दिया जाता. ऐसा उन्होंने आरोप लगाया है. हाल ही नदी के गति को रोक एक मकान का निर्माण को केंद्र कर इलाके में विवाद शुरू हुआ. विविदित परियोजना इलाके के परिदर्शन को पूर्वप्रबंधन शिखा बनर्जी पहुंची थी. इसके बाद ही निर्माण कार्य का विरोध करने पर स्थानीय कुछ जमीन के दलालों ने उनकी जमकर पिटाई की. इस घटना से उन्हें काफी अपमानित महसूस हुआ. और उन्होंने पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला लिया. उनका आरोप है कि विभिन्न पार्टियों को डूबो कर जो लोग तृणमूल में आये हैं शीर्ष नेतृत्व उन्हें ही प्रमुखता दे रहा है. पुराने व पार्टी के कार्यों से जो लोग बैठ गये हैं नेतृत्व उन्हें कोई महत्व नहीं दे रहा है. वे केवल रूपये को ही प्रधानता दे रहे हैं. इसलिए मन में दुख होने के बावजूद पार्टी के भीतर यह गंदगी वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है. इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया. 

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