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मां के आगमन की तिथि पर तारापीठ में उमड़े लाखों श्रद्धालु

कोलकाताः बुधवार को तारापीठ में मां के आगमन की तिथि है. इस पूण्यतिथि के उपलक्ष्य में तारापीठ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे. उपस्थित सभी भक्तों ने मां से अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रर्थना की. बुधवार को कोजागरी लक्ष्मीपूजा के पहले शुक्‍ल चतुदर्शी तिथि ही तारा मां केआगम की तिथि के रूप में पालित होते आ रही है. कहते हैं कि पाल सासन के समय जयदत्त ने स्वप्नादेश पाने के बाद श्मशान के श्‍वेत शिमूल पेड़ के नीचे पंचमुंडी आसन के नीचे मां तारा के शिलामूर्ति की स्थापना की थी. पूजा की शुरुआत तभी से हुई. तभी से जागृत मां की पूजा यहां धूमधाम से होती आ रही है. सिद्धपीठ में मां तारा उत्तरमुखी है. परंतु आगमन तिथि पर मां को पश्‍चिम मुखी दिशा में बैठाकर पूजा की जाती है. सूर्योदय के पश्‍चात मां को गर्भगृह से बाहर निकाल कर विश्राम मंदिर में लाया जाता है. उसके बाद मनमोहक श्रृंगार के बाद मातृअराधना की जाती है. इस दिन मां को किसी प्रकार के अन्न का भोग नहीं लगाया जाता. सभी उपवास रहते हैं. शाम को आरती के बाद खिचड़ी और पांच प्रकार के तले हुए व्यंजन का भोग लगाया जाता है. यह प्रसाद खाकर भक्त अपना उपवास तोड़ते हैं.

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