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युवा दिवस पर विशेष: चुनौतियों के पहाड़ तो अवसरों के आकाश भी

भारत में युवाओं की आबादी 43 करोड़ है। यह संख्या दुनिया के 2क्1 देशों से अधिक है। हमारी ताकत है कि यहां सालाना 15 लाख इंजीनियर और 5क् हजार डॉक्टर निकलते हैं। लेकिन अपराध में शामिल 41 प्रतिशत युवा हमारी कमोजरी है। 21वीं सदी के युवा के सामने चुनौती और अवसर दोनों हैं। ऐसे ही दस अवसर और 11 चुनौतियां.

बेरोजगारी: रोजगार घटने से खतरे 
भारत में बीस वर्ष की उम्र से ऊपर के करीब 14.30 करोड़ युवाओं को नौकरी की तलाश है। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन की ‘2017 वल्र्ड एंप्लायमेंट ऐंड सोशल आउटलुक’ रिपोर्ट बेहर्द चिंताजनक है। 2015-16 के दौरान बेरोजगारी दर बढ़ कर पांच फीसद तक पहुंच गई है, जो बीते पांच सालों में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017-18 में रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। एक अन्य रिपोर्ट के हवाले से रोजाना साढ़े पांच सौ नौकरियां घट रही हैं।

मशीनीकरण: इंसानों की जगह लेते रोबोट 
औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ रहे मशीनी प्रभाव से भी नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। इंसानों की जगह मशीनें, रोबोट ले रहे हैं। हालिया रिपोर्ट में एसोचैम और पीडब्ल्यूसी ने भी कम कार्यकुशल पीडब्ल्यूसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक मशीनीकरण की वजह से अमेरिका में 38 फीसद, जर्मनी में 35, इंग्लैंड में 30 और जापान में करीब 21फीसद नौकरियां कम हो जाएंगी। भारत में भी इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

शिक्षा: शोध और विकास के क्षेत्र में पर्याप्त खर्च नहीं 
यूएन शिक्षा सूचकांक के अनुसार भारत 181 देशों में 147वें स्थान पर है। आईआईटी और आईआईएम को विश्व भर में जाना जाता है लेकिन वे भारत के वर्तमान विकास के लिए जरूरी इंजीनियर और मैनेजर प्रशिक्षित करने की हालत में नहीं हैं। शोध और विकास के क्षेत्र में भी भारत पर्याप्त खर्च नहीं कर रहा है। वह अपने प्रतिद्वंद्वियों चीन और दक्षिण कोरिया से बहुत पीछे है।

जीवन शैली: 23 लाख की असमय मौत 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक भारत में 10 से 24 आयु वर्ग की करीब 23 लाख युवा आबादी हर साल असामायिक मौत की शिकार हो जाती है। इसकी बड़ी वजह बदलती जीवन शैली है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कार्य के आधुनिकीकरण ने दिन और रात के भेद को खत्म कर दिया है।

नशा: 80 लाख धूम्रपान की गिरफ्त में 
भारत दुनिया में नशाखोरी के मामले में दूसरे स्थान पर है। यहां 10 करोड़ 80 लाख युवा धूम्रपान की गिरफ्त में हैं। देश में प्रतिवर्ष धूम्रपान की वजह से 10 लाख लोगों की मौत हो रही है। देश में करीब 21.4 प्रतिशत युवा शराब के नशे के शिकार हैं। 0.7 प्रतिशत लोग अफीम और 3.6 प्रतिशत लोग प्रतिबंधित ड्रग लेते हैं।

गरीबी: हर पांचवां युवा गरीबी में 
यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के अमीर देशों में हर पांचवा किशोर या युवा गरीबी में रहता है। अमेरिका में ही करीब 30 फीसदी युवा गरीब हैं। अमीर देशों में भी हर आठ में से एक युवा को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता।

आतंकवाद: 800 से अधिक आतंकवादी गुट सक्रिय 
भारत में आतंकी गुटों की जड़ें लंबे समय से पसरी हुई हैं। युवा इसलामिक स्टेट के चंगुल में फंसते जा रहे हैं। इसलामिक स्टेट के लड़ाकों में करीब दो दर्जन भारतीय युवाओं के ही होने की रिपोर्ट है। देश में 800 से अधिक आतंकवादी गुट सक्रिय हैं।

भ्रष्टाचार: अर्थव्यवस्था पर चोट से नुकसान 
भ्रष्टाचार युवाओं के सामने बड़ी समस्या है। भारत की प्रमुख कारोबारी संस्था फेडरेशन ऑफ इंडियन फिक्की का कहना है कि भारत में प्रतिवर्ष भ्रष्टाचार के कारण सात अरब डॉलर का नुकसान हुआ। भ्रष्टाचार का सीधा असर निवेश पर पड़ता है और इससे युवा प्रभावित होते हैं।र्

लिंगभेद: बांग्लादेश से भी पिछड़े 
आज की युवा पीढ़ी और विकास के लिए लिंगभेद बड़ी चुनौती है। स्त्री-पुरुष असमानता रिपोर्ट-2017 के अनुसार भारत ने महिला-पुरुष असमानता को 67 प्रतिशत तक कम किया है लेकिन अब भी बांग्लादेश से पीछे हैं। बांग्लादेश 47वें और चीन 100वें स्थान पर है।
अपराध: बेरोजगारी से बढ़ता खतरा 
भारत में हत्या, बलत्कार जैसे संगीन अपराधों में 41 फीसदी आरोपी 18 से 30 साल की उम्र के युवा हैं। इसके अलावा हाईटेक समाज साइबर क्राइम की गिरफ्त में भी फंसता जा रहा है।

बाजार: हर साल बढ़ रहा दायरा

ऐसोचैम की रिपोर्ट के अनुसार साल 2014 में ई बाजार बाजार 17 अरब डालर था। 2016 में इसने 38 अरब डालर की सीमा पार की और करीब ढाई लाख को रोजगार दिए। अनुमान के मुताबिक 2018 में यह आंकड़ा 45 अरब डालर के पार हो सकता है और करीब तीन लाख नये रोजगारों का सृजन करेगा।

विदेश: दुनिया देख रही भारत की तरफ 
विभिन्न देशों, कंपनियों, यूनिवर्सिटीज और ट्रेंड डेलिगेशंस के साथ एमओयू और साझेदारियों में काफी इजाफा हुआ है। अमेरिका में सबसे अधिक डॉक्टर और इंजीनियर भारत के हैं। नासा में दस में से चार वैज्ञानिक भारतीय मूल के ही हैं। जापान जैसे देशों में भी भारतीयों की मांग बढ़ी है।

स्टार्टअप: दो साल में तीन लाख नौकरियां 
स्टार्टअप्स से 2020 तक 3 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी। देश में उद्यमशीलता की इस लहर को बढ़ावा दे रहे हैं डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे कदम। देश की राजधानी दिल्ली के आसपास का इलाका जैसे गुड़गांव और नोएडा स्टार्टअप्स का गढ़ बन रहे हैं। रोजगार के लिए नोएडा युवाओं की पहली पसंद है।

एसोचैम-केपीएमजी की ज्वाइंट स्टडी के अनुसार, 4जी तकनीकी से दूरसंचार क्षेत्र में 2018 तक 30 लाख जॉब के मौके बन सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि 4जी तकनीकी के साथ डाटा बढ़ने, मार्केट में नई कंपनियों की एंट्री, डिजिटल वॉलेट आने, स्मार्टफोन की लोकप्रियता लगातार बढ़ी रही है।

दूरसंचार: 4जी से मिलेगी मदद 
एसोचैम-केपीएमजी की ज्वाइंट स्टडी के अनुसार, 4जी तकनीकी से दूरसंचार क्षेत्र में 2018 तक 30 लाख जॉब के मौके बन सकते हैं। रिपोर्ट बताती है कि 4जी तकनीकी के साथ डाटा बढ़ने, मार्केट में नई कंपनियों की एंट्री, डिजिटल वॉलेट आने, स्मार्टफोन की लोकप्रियता लगातार बढ़ी रही है।

कृषि: कुशल युवाओं की जरूरत 
कृषि व इससे संबद्ध क्षेत्र में रोजगार के भारी अवसर पैदा हुए हैं। खेती की इस मांग को पूरा करने के लिए कुशल युवाओं की जरूरत है। कृषि मंत्रालय के सहयोग से देशभर में प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। कृषि मंत्रलय ने वर्ष 2022 तक कुल 6.35 लाख युवाओं को हुनरमंद बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

ऑटोमोबाइल: सबसे बड़ा रोजगार 
भारत में रोजगार देने के मामले में ऑटोमोबाइल सेक्टर काफी आगे है। यह उद्योग सबसे अधिक भर्ती करने वालों की श्रेणी में आता है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में डिजाइन इंजीनिर्यंरग, मैनूफैक्र्चंरग इंजीनियर, डेवलपमेंट बनने के मौके हैं। यही वजह है अब युवा कंप्यूटर छोड़ मैकेनिकल इंजीनिर्यंरग की तरफ बढ़ रहे हैं।

आईटी: एक बार फिर जागी उम्मीद 
बीता साल भारत में आईटी सेक्टर में नौकरियों के लिए थोड़ा व्यवधान भरा रहा लेकिन वर्ष 2018 में नौकरियों का परिदृश्य बेहतर दिख रहा है। इस साल सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में दो लाख से अधिक नौकरियां मिलने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 में करीब 20% अधिक नियोक्ता नौकरियां देंगे।

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