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राज्य में हालात वाम मोर्चा सरकार से भी बदतर: पीएम मोदी

मेदिनीपुर (पश्चिम बंगाल) । वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के आपने संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत को आगे ले जाने में किसानों का योगदान अमूल्य है। देश की उन्नति के लिए गांव और किसानों की उन्नति आवश्यक है। उन्होंने ममता सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जहां राज्य में हालात वाम मोर्चा सरकार से भी बदतर हो गए हैं, वहीं सरकार वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति में मशरूफ है।

सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। उसी के कारण उनकी यह दुर्दशा हुई है। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार किसान हित में ही सोचती है और योजनाएं बनाकर उन्हें अमलीजामा पहना रही है। इसी क्रम में हाल ही में खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया गया है। हमारी सरकार किसानों की सरकार है और किसान हमारे अन्नदाता हैं।

प्रधानमंत्री ने बांग्ला भाषा में अपने संबोधन में कहा कि भारत को आगे ले जाने में किसान भाइयों का योगदान अमूल्य है, इसलिए हमारे किसान भाइयों के इस विपुल जन समावेश को देखकर मैं खूब आनंदित हूं। उन्होंनें कहा, ‘मैं ममता दीदी का आभारी हूं। मैंने देखा कि आज मेरे स्वागत में उन्होंने इतने झंडे लगाए, इतने झंडे लगाए, मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं और मैं उनका इसलिए भी आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने स्वयं सत्कार में हाथ जोड़े मुद्रा में प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए चारों तरफ अपनी होर्डिंग्स लगाई हैं। किसानों के लिए मैंने इतना बड़ा फैसला किया है कि तृणमूल को भी मेरे स्वागत में झंडे लगाने पड़े। यह भारतीय जनता पार्टी की नहीं बल्कि किसानों की विजय है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने बंगाल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मां-माटी और मानुष की सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। सिंडिकेट की सरकार, जिसकी मर्जी के बगैर बंगाल में कुछ नहीं किया जा सकता है। किसान अपनी फसल कहां और कितने में बेचे, यह भी सिंडिकेट तय करेगा। यहां तक कि कॉलेजों में दाखिला भी सिंडिकेट की मेहरबानी से मिलता है। सरकार सिंडिकेट की देखभाल करने में जुटी है।

पीएम मोदी ने ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पंचायत चुनाव में भाजपा के दलित कार्यकर्ताओं की हत्या कराई गई। उन्होंने गहरी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि यहां पूजा करने का अधिकार नहीं है बल्कि बंगाल की महान परंपरा को वोट बैंक के लिए खत्म किया जा रहा है। जिस भूमि से वंदेमातरम की शुरुआत हुई, उसी भूमि पर तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम का बार-बार अपमान होता है। क्योंकि तृणमूल लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती है। 

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