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विधानसभा में ममता के खिलाफ डेंगू होगा विपक्ष का हथियार

कोलकाता ः पश्चिम बंगाल में 20 नवम्बर से राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है। 10 दिनों तक चलने वाले इस सत्र में पहाड़ और कानून व्यवस्था समेत तमाम मुद्दों पर विपक्षी पार्टियां राज्य सरकार को घेरने की तैयारी कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इस बार राज्य सरकार के खिलाफ विपक्ष के हाथ सबसे बड़ा हथियार डेंगू का प्रकोप होगा। चुंकी राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ही स्वास्थ्य मंत्री भी हैं इसीलिए सरकार को घेरने के लिए डेंगू सबसे कारगर हथियार होगा।विधानसभा में विपक्ष के नेता अब्दुल मन्नान ने पहले ही स्वास्थ्य मंत्री के रूप में ममता बनर्जी को चिट्ठी लिख कर आरोप लगाया है कि राज्य सरकार डेंगू रोकथाम के लिए सक्रिय नहीं है। उसके अलावा प्रदेश कांग्र्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी नें भी आरोप लगाया था सरकार डेंगू से होने वाली मौतों पर पर्दा डालने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के द्वारा अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि डेंगू से मौत संबंधी उल्लेख मृत्यु प्रमाण पत्र में ना करें। भाजपा भी इसके खिलाफ स्वास्थ्य भवन के बाहर प्रदर्शन कर चुकी है। माकपा तो काफी पहले से इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरती रही है। माना जा रहा है कि इस शीतकालीन सत्र में विपक्ष के हाथ डेंगू ही एक ऐसा हथियार है जिसे लेकर सामरिक रूप से विपक्ष राज्य सरकार को घेरने की कवायद में जुटी है।

इसके अलावा पहाड़ पर सब इंस्पेक्टर अमिताभ मलिक की मौत से संबंधित मुद्दे को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा जाएगा। बताया गया है कि अमिताभ की मौत की जांच एनआईए अथवा अन्य केंद्रीय एजेंसियों से करवाने की मांग भी विधानसभा में जोर शोर से उठने वाला है क्योंकि राज्य सरकार पर आरोप लगा है कि बिमल गुरुंग को फंसाने के लिए राज्य सरकार द्वारा बुने गए जाल में फंसकर ही अमिताभ मल्लिक बलि का बकरा बने हैं।

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