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विलुप्त होती कलाओं से सजा ‘अतुल्य भारत’ समारोह

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नई दिल्ली। उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा कनॉट प्लेस में आयोजित छह दिवसीय ‘अतुल्य भारत’ महोत्सव के पहला दिन विलुप्त होती लोक कलाओं के रंगारंग प्रस्तुतियां के नाम रहा । 

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत मुम्बई के शास्त्रीय गायक उस्ताद ग़ुलाम अब्बास ने खयाल, तराना, और ठुमरी प्रस्तुत कर की। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की पहचान विश्व में अपनी कला एवं संस्कृति के लिए है । 

इसके बाद उत्तराखंड कुमाऊं का लोकनृत्य छपेली नृत्य प्रस्तुत किया गया। छपेली नृत्य कुमाऊं अंचल के त्योहार एवं मांगलिक कार्यों में किये जाने वाला नृत्य है। इस लोक नृत्य में करीब 15 कलाकारों ने इस नृत्य की प्रस्तुति की। इसके बाद गुजरात के गरबा नृत्य किया गया जिसे नवरात्रि के दौरान किया जाता है। गरबा नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जम्मू एवं कश्मीर राज्य का सबसे प्रसिद्ध लोक नृत्य रउफ नृत्य किया गया। यह नृत्य फसलों की कटाई हो जाने के पश्चात स्त्रियों द्वारा किया जाता है। 
विदुषी कस्तूरी पटनायक द्वारा ओड़िसी नृत्य प्रस्तुत किया गया। विदुषी कस्तूरी पटनायक ओडिसी नृत्य की एक प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं जिन्हें देश-विदेश में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। विदुषी कस्तूरी पटनायक ने घरा नाता पर प्रस्तुति दी ।

अतुल्य भारत’ कार्यक्रम को एक त्योहार बताते हुए विदुषी कस्तूरी पटनायक ने कहा कि देश में ऐसे कार्यक्रम निरन्तर होने चाहिए ताकि देश को विभिन्न लोक नृत्यों के बारे में पता चल सके।
दिल्ली की नृत्यांगना रंजना गौहर ने ‘चित्रांगदा’ नृत्य कर दर्शकों का मन मोह लिया। चित्रांगदा एक ओडिसी नृत्य है जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा करीब 15 कलाकारों के साथ मिलकर तेलंगाना का प्रसिद्ध लोक नृत्य ‘माथुरी’ प्रस्तुत किया गया।

इस नृत्य में श्री कृष्ण की रासलीला दिखाई गई। अंत में असम का प्रसिद्ध बिहू नृत्य किया गया। यह नृत्य फसल कटाई के विभिन्न स्तरों पर नए मौसम के आगमन पर भी किया जाता है। 
उल्लेखनीय है कि संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम 8 से 12 अगस्त तक चलेगा।

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