कोलकाता

श्रीजात पर चीखने वाले तस्लीमा पर चुप क्यों थे : दिलीप घोष

कोलकाता। असम के सिलचर में आयोजित कवि सम्मेलन के दौरान त्रिशूल पर कविता लिखकर विवादों में घिरे पश्चिम बंगाल के मशहूर कवि श्रीजात बनर्जी के खिलाफ हुए प्रदर्शन और कथित बदसलूकी को लेकर बंगाल में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। तीन दिन पहले घटी इस घटना को लेकर पश्चिम बंगाल का बुद्धिजीवी वर्ग मुखर होने लगा है। बड़ी संख्या में लोग सोशल साइट पर इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं और असम की भाजपा सरकार पर असहिष्णुता का आरोप लगा रहे हैं। 

 इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने श्रीजात मामले को लेकर बिफर रहे बुद्धिजीवियों से सवाल किया है कि जब पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश की निष्कासित लेखिका तस्लीमा नसरीन को भगाया गया था तब इन लोगों ने क्यों चुप्पी साध रखी थी?
दिलीप घोष ने कहा कि श्रीजात बनर्जी को असम में कविता नहीं पढ़ने दिया गया। निश्चित तौर पर यह सही नहीं है। उन्हें कुछ भी लिखने का अधिकार है और वे लिख रहे हैं।

उसी तरह से उनका विरोध करने का अधिकार भी लोगों को है और उन लोगों ने किया है। हालांकि इसे जायज नहीं ठहराया जा सकता लेकिन मैं इस मामले पर शोर मचाने वाले तमाम बुद्धिजीवियों से पूछना चाहता हूं कि वे तब क्यों चुप थे जब पश्चिम बंगाल से कट्टरपंथियों के दबाव में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने बांग्लादेश की निष्कासित लेखिका तस्लीमा नसरीन को निकाल दिया था। आज सात सालों से पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का शासन है और तस्लीमा नसरीन बंगाल नहीं आ पा रही हैंं। तब क्या इन बुद्धिजीवियों को यह नहीं समझ में आता कि वाकई में असहिष्णुता यहां काफी पहले से रही है। दिलीप ने आरोप लगाया कि आज जितने भी लोग श्रीजात बनर्जी के पक्ष में खड़े हैं ये फर्जी बुद्धिजीवी हैं क्योंकि सुविधानुसार इन्हें चीखने की आदत है। 

दिलीप घोष ने कहा कि जैसे ही इन्हेें राजनीतिक तौर पर इशारा मिलता है, ये अपने हंगामे का खेल खेलने लगते हैं लेकिन लोग समझ चुके हैं और इनके हंगामे से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब सिलीगुड़ी में हालात सही नहीं थे और भाजपा ने वहां का दौरा किया था तब मेरे ऊपर भी हमले हुए थे। तब एक भी बुद्धिजीवी इसकी निंदा करने के लिए सामने नहीं आया था। 

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