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संतों के श्राप से नहीं जीत पाएंगे चुनाव : कंप्यूटर बाबा

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भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी घमासान जोरों पर है। पिछले पंद्रह साल से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। ऐसे में शिवराज सरकार ने आगामी चुनाव के लिए कमर कस ली है। वहीं शिवराज सरकार को चुनौती देने के लिए विपक्ष के साथ उन्हीं की पार्टी के लोग मैदान पर उतर आए हैं।

हाल ही में मप्र में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त संत कंप्यूटर बाबा ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। एक वक्त ऐसा था जब कंप्यूटर बाबा शिवराज सिंह की तारीफों के पुल बांधते हुए नहीं थकते थे। उन्होंने शिवराज सरकार पर हिंदू धर्म को अनदेखा करने का आरोपा लगाया। अब कंप्यूटर बाबा साफ कह चुके हैं कि उनका मकसद मुख्यमंत्री को हराना है।

उन्होंने शिवराज सरकार को हिंदू विराधी बताते हुए कहा कि मुझे ऐसा लगा कि शिवराज धर्म के विपरीत हैं और धर्म से जुड़ा कोई काम करना ही नहीं चाहते हैं। इस वजह से मैंने इस्तीफा दिया है। कप्यूटर बाबा ने कहा, ‘शिवराज सरकार को मध्य प्रदेश में राज करते-करते 15 साल हो गए। इन्होंने संतों को ऐसे मढ़ दिया है कि संतों के बारे में कहा जाता है कि वे बीजेपी के हैं, आरएसएस के हैं। संत समाज इस सरकार से बेहद दुखी है’। बाबा के मुताबिक संतो की बैठक में फैसला लिया जाएगा कि वे चुनाव में किस पार्टी का समर्थन करेंगे।

बता दें कि इस्तीफा देने के बाद बाबा ने कहा था कि वह सरकार में रह कर बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन शिवराज सरकार ने उन्हें विकास कार्य करने से रोका। मैंने गायों और नर्मदा नदी पर अवैध खनन की स्थिति पर चर्चा की लेकिन मुझे कुछ भी करने की इजाजत नहीं थी। मैं संतों के विचार नहीं रख सका और इसलिए मैं इस तरह की सरकार का हिस्सा बनना नहीं चाहता हूं।

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