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हड़ताल के जरिए अस्तित्व बचाना चाहते हैं माकपा कांग्रेस, बंद बेअसर : दिलीप घोष

कोलकाता। केंद्रीय श्रम नीतियों के खिलाफ वामपंथी संगठनों द्वारा आहूत दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के पहले दिन पश्चिम बंगाल में इसका मिलाजुला असर रहा है लेकिन प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने बंद को राज्य में न सिर्फ बेअसर बताया है बल्कि इसे माकपा और कांग्रेस के लिए अस्तित्व बचाने की कोशिश करार दिया है।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में वे हड़ताल को लेकर पत्रकारों से मुखातिब हुए। इस दौरान दिलीप घोष ने कहा कि राज्य भर में हड़ताल को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने माकपा की मदद की है लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ और कोलकाता समेत राज्य भर में इसका असर शून्य था। घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल से माकपा और कांग्रेस अपनी जमीन खो चुकी है। अपने अस्तित्व को दोबारा दिखाने के लिए लोकसभा चुनाव से पहले माकपा द्वारा हड़ताल का नाटक किया जा रहा है।

इसका कोई लाभ होने वाला नहीं है। घोष ने कहा कि श्रमिकों और मजदूरों के अधिकारों से संबंधित जिन मांगों को लेकर वामपंथी श्रमिक संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया था उनमें से अधिकतर मांगों को केंद्र सरकार ने पहले ही पूरा कर दिया है। ऐसे में हड़ताल करने का कोई मायने ही नहीं रहता है। उन्होंने सितंबर महीने में भाजपा द्वारा आहूत बंगाल बंद का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षक नियुक्ति की मांग पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

इसके खिलाफ भाजपा ने 28 सितंबर को बंगाल बंद का आह्वान किया था और लोगों ने बड़े पैमाने पर इसका समर्थन भी किया था क्योंकि इसके पीछे कोई राजनीति नहीं थी, लेकिन माकपा द्वारा आहूत हड़ताल पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और पूरे देश में अपना अस्तित्व खो रहे वामपंथी पार्टियां लोकसभा चुनाव से पहले अपनी मौजूदगी का झूठा दिलासा खुद को देना चाहती हैं। इसीलिए हड़ताल किया गया है लेकिन इसका ना तो कोई लाभ होने वाला है और ना ही कोई भी हड़ताल सफल रहा है। घोष ने यह भी दावा किया कि बुधवार को भी वामपंथी पार्टियों द्वारा आहूत बंद का असर पश्चिम बंगाल या देश के किसी भी हिस्से में नहीं होगा।

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