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हर महीने किससे मिलने वृंदावन जाते हैं तेजप्रताप

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव के तलाक की खबरों से इन दिनों लालू परिवार मुश्किलों में घिरा हुआ है। तेजप्रताप को समझाने की कोशिशों में लगे परिवार के सदस्यों के अलावा खुद लालू प्रसाद यादव भी अभी तक अपने बड़े बेटे को समझा पाने में नाकाम नजर आ रहे हैं। तेजप्रताप मीडिया के सामने खुले तौर पर ऐलान कर चुके हैं कि अगर पीएम भी उन्हें समझाने आएंगे तो वो नहीं मानेंगे। इस बीच खबर है कि तेजप्रताप यादव फिर से वृंदावन चले गए हैं। आखिर वो कौन है, जिससे मिलने के लिए तेजप्रताप यादव हर महीने बिहार से वृंदावन जाते हैं।

वृंदावन के छोटू महाराज के संपर्क में तेजप्रताप

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक, तेजप्रताप यादव लगभग हर महीने ही वृंदावन जाते हैं। सूत्रों की मानें तो तेजप्रताप वृंदावन में ज्ञानेंद्र गुसाईं उर्फ छोटू महाराज को अपना गुरु मानते हैं। बताया जाता है कि तेजप्रताप यादव बिहार में हों या कहीं और, वो छोटू महाराज के लगातार संपर्क में रहते हैं और ज्यादातर मौकों पर उनसे ही सलाह मशविरा करते हैं। पिछले दिनों सितंबर महीने में छोटू महाराज ने ही राधा अष्टमी के दिन तेजप्रताप यादव की पूजा संपन्न कराई थी। पूजा के वक्त तेजप्रताप के कुछ करीबी दोस्त ही उनके साथ वहां मौजूद थे।

तलाक की अर्जी से दो दिन पहले गए थे वृंदावन

सूत्रों का कहना है कि वृंदावन में तेजप्रताप यादव सभी तरह के पूजा पाठ छोटू महाराज के सानिध्य में ही पूरे करते हैं। ज्ञानेंद्र गुसाईं उर्फ छोटू महाराज बांके बिहारी मंदिर के सेवादार और गुसाईं परिवार से हैं। बताया जा रहा है कि तलाक की अर्जी दाखिल करने से दो दिन पहले भी तेजप्रताप यादव वृंदावन गए थे। तेजप्रताप ने वहां से गायों के साथ बांसुरी बजाते हुए अपना एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था। तेजप्रताप यादव ने बीते शुक्रवार को पटना के फैमिली कोर्ट में अपनी पत्नी ऐश्वर्या से तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

क्या करना है, परिवार के लोग जानते हैं’

वहीं, इस मामले पर तेजप्रताप यादव के छोटे भाई तेजस्वी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें अपने परिवार से ज्यादा राज्य के गरीबों की चिंता है। इस मामले को लेकर मीडिया के सवालों पर भड़के तेजस्वी यादव ने कहा, ‘लगता है कि आजकल लोग टीवी पर बिग बॉस ज्यादा देखने लगे हैं। इस मामले पर मैं क्या बात करूं और क्यों बात करूं? ये मेरे परिवार का निजी मामला है, इसे क्यों इतना तूल दिया जा रहा है? इस मामले को सुलझाने के लिए मेरे परिवार के लोग हैं और वो इसे सुलझा लेंगे। क्या करना है, कैसे करना है, मेरे परिवार के लोग ये जानते हैं। मेरे परिवार के मामलों की चिंता आप लोग मत कीजिए।’

 

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