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हावड़ा में सौ बीघे में फैला कूड़े का ढेर

कोलकाता। कोलकाता से सटे हावड़ा जिले के बेलगछिया में 100 बीघे से अधिक जमीन पर कूड़े का ढेर फैला है।इससे कूड़े के ढेर के आसपास बसे नागरिक तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। इसके अलावा पर्यावरण को भी काफी नुकसान पहुंच रहा है।राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा वायु प्रदूषण रोकने संबंधी प्रावधानों के पालन में विफल होने पर पश्चिम बंगाल सरकार पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाये जाने के बावजूद राज्य सरकार की निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 

हावड़ा जिले के बेलगछिया में 100 बीघे से अधिक जमीन पर कूड़े के ढेर फैला है जो अब नागरिकों के लिए मुसीबत बन गया है। जिले में बीमारी का पर्याय बने कूड़े के ढेर को लेकर राज्य के मशहूर पर्यावरणविद सुभाष दत्ता ने बताया कि कोलकाता से सटे हावड़ा जिले में इस तरह से इतनी बड़ी जमीन पर बिना किसी तय योजना के कूड़े का ढेर जमा होना, राज्य सरकार की पर्यावरण के प्रति लापरवाही को दर्शाने वाला कार्य है। इस समस्या पर जनहित याचिका लगाकर कार्रवाई की मांग की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि हावड़ा जिले से निकलने वाले सारे कचरे समेत नगर निगम का भी सारा कूड़ा बेलगछिया में ही फेंका जाता है। इसमें आए दिन आग लगती रहती है और धुएं का गुबार आसपास के क्षेत्रों में फैलता है। उन्होंने बताया कि 2016 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने बेलगछिया कूड़े के ढेर को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करने का निर्देश दिया था, इसका पालन आज तक नहीं हुआ है। 

दुर्गंध से नागरिकों का जीना मुहाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी हवा चलती है, इस कूड़े के ढेर से इतनी अधिक दुर्गंध आती है कि लोगों का आसपास रहना दूभर होता जा रहा है। बार-बार नगर निगम में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी सालों से इस पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। कुछ महीनों पहले नगर निगम की ओर से कहा गया था कि इस कूड़े से बिजली बनाई जाएगी, लेकिन इस दिशा में निगम की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जाने के बाद स्थानीय लोग बेहद नाराज हैं। 

हावड़ा नगर निगम के मेयर परिषद के सदस्य गौतम चौधरी ने कहा कि हावड़ा नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन 730 टन कूड़ा निकलता ह। इसे बेलगछिया में निष्पादित किया जाता है।यह जगह भी कूड़े से भर गई है। अतिरिक्त तौर पर डोमजूर में जगह ली गई है, जहां कूड़ा निष्पादन की योजना बनाई जा रही है।

एनजीटी ने ठोंका था पांच करोड़ का जुर्माना
उल्लेखनीय है कि हाल ही में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने वायु प्रदूषण रोकने संबंधी प्रावधानों के पालन में विफल होने पर पश्चिम बंगाल सरकार पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। राज्य के पर्यावरण मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाने की घोषणा की है। लेकिन, जो पहले से तय दिशा-निर्देश हैं, उस क्षेत्र में राज्य सरकार की निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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