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75 गांवों की 2 हजार महिलाएं युवतियां फंसी है देह व्यापार में

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मंदसौर। जिले को जितनी पहचान अफीम खेती से मिलती है, उतनी ही बदनामी बाछडा समाज के देह व्यापार को लेकर भी होती है। मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले के 75 गंावों में बाछडा समुदाय की आबादी 23 हजार हैं इनमें दो हजार से अधिक महिलाएं और युवतियां देह व्यापार के दलदल में धंसी है। मंदसौर जिले के 38 गांवों में लगभग 450 महिलाएं औ युवतियां देह व्यापार में लगी है। सच यह भी है कि समाज के पैसठ प्रतिशत लोग इसके खिलाफ है। पर खुलकर बोल भी नहीं रहे हैं। समुदाय की 12 युवतियांेे सहित 150 युवा कलंक के खिलाफ लडाई लड रहे हैं। मंदसोर जिले के 38 गांवों में बाछडा समुदाय की चार हजार से अधिक आबादी है। परंपरा के नाम पर समुदाय के कई लोग आज भी बेटियों को देह व्यापार के दलदल में धकेल रहे हैं।
एनजीओ नई आभा सामाजिक चेतना समिति के आकाश चैहान ने बताया कि अभी तक 29 युवतियों को देह व्यापार के दलदल से मुक्त करा चुके हैं। रतलाम जिले के ढोढर क्षेत्र में पीरूलाल भाटी, राज नायक इस अभियान में सतत सक्रिय है। इनका कहना है कि मंदसौर, नीमच और रतलाम जिले में 75 गांवों में देह व्यापार चल रहा है। इनमें दो हजार से ज्यादा महिलाएं युवतियां फंसी है। 2013 के बाद इस बुराई के खिलाफ युवा बढ रहे हैं। आज समुदाय के ही 150 से अधिक युवा समाज का यह दाग धुलने में लगे हैं। इस कलंक को मिटाने के लिए प्रशासन ने भी कई बार प्रयास किए। लेकिन सफलता नहीं मिली। इस संबंध में जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी रविंद्र महाजन ने बताया कि समुदाय को जागरूक करने के प्रशासन के प्रयास जारी है। समुदाय की महिलाओं को स्वरोजगार से जोडने के प्रयास किए जा रहे हैं। 2015 में हुए सर्वेक्षण में जिले में 38 गांवों में समुदाय निवासरत है। विभाग द्वारा परचा तैयार किया गया है, जिसमें देह व्यापार पर कानून के प्रावधानों की जानकारी दी जा रही हैं। समुदाय के कई युवक युवतियां इस बुराई के खिलाफ लड रहे हैं।

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