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रविवार को होना था विवाह, अग्निकांड में उजाड़ा परिवार संजोने का सपना

कोलकाता। रोज कुंआ खोदती हूं रोज पानी पीने वाला परिवार था. सिर के उपर एक झोपड़ी ही उनका एकमात्र सहारा था. उसी घर में विवाह का आयोजन किया गया था. परंतु विध्वंश भयावह आग ने उनसे उनका सब कुछ छीन लिया. रविवार को ही विवाह होना तय था. उस मुताबिक शुक्रवार को हल्दी की रस्म थी. विवाह की भी पूरी तैयारियां लगभग कर ली गयी थी. विवाह का मंडप भी बांधा जा चुका था. पर सर्वग्रासी आग ने संसार संजोने से पहले ही सारे सपनों को छीन लिया. सब कुछ समाप्त हो गया. कागज चुन कर रोज जितना आय होता है, उसी में थोड़ा थोड़ा बेटी के विवाह के लिए मां ने रुपया इक्ट्ठा किया

बेटी के लिए उन्होंने गहने भी बनवाये थे. पर अब कहां क्या, गहनों की तलाश में रोते हुए मां को जले राख को घाटंते हुए मां  को देखा गया. अगर कुछ भी मिल जाये पर चारो और तो केवल काली राख के अंबार के ढेर ही है.  उल्लेखनीय है कि वृहस्पतिवार दोपहर लगी भयावह आग्निकांड की घटना आर्मेनियम घाट के पास एक रासायनिक गोदाम में घटी. रासायनिक पदार्थ में आग लगने के कारण वह काफी तेजी से पास की झोपड़ियों तक फैल गयी.इस घटना में ७० परिवारों का सब कुछ जल कर खाक हो गया. झोपड़ी में ऐसे ही एक परिवार की निवासी यह अभागे मां-बेटी हैं. बेटी के विवाह के पहले इतनी बड़ी विपदा घट गयी है मां को विश्‍वास नहीं हो रहा है. बेटी को बांहों में भर कर बेबस मां के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. रोते रोत उनकी तबियत भी बिगड़ गयी. बेटी को मां को संभालने की कोशिश करने देखा गया, पर जरा सोचिए उस मां के मन के बारे में क्या वह इसती आसानी से बेटी के विवाह के सपनों को चकनाचूर होता भला कैसे देख सकती है.आर्मेनियम घाट इलाके में चारो ओर केवल सब कुछ खोने वालों का हाहाकार ही सुनाई दे रहा है. 

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