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भाजपा गठबंधन से अलग हुआ तेलगु देशम पार्टी

नई दिल्ली: तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) का राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से अलग हो गई है. टीडीपी का राजग से अलग होने का फैसला न सिर्फ मोदी सरकार के लिए पूर्वोत्तर में मिली जीत के रंग में भंग का काम कर रही है. इतना ही नहीं 2019 में होने जा रहे आम चुनाव में भी राजग को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि आंध्रप्रदेश से लोकसभा की 25 सीटें हैं. ये करीब उतनी ही सीटें हैं, जितनी की पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में निचले सदन की कुल सीटे हैं. हालांकि टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने राजग के साथ अपने पार्टी के भविष्य पर फैसला फिलहाल नहीं लिया है. भाजपा सूत्रों ने सुझाव दिया है कि टीडीपी सांसदों को केंद्र से निकलना होगा क्योंकि नायडू सरकार में शामिल भाजपा मंत्रियों ने भी प्रदेश सरकार से निकलने का मन बना लिया है.

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने 7 मार्च की रात केन्द्र की राजग सरकार से हटने का फैसला किया और मोदी सरकार में शामिल अपने दो मंत्रियों से 8 मार्च को इस्तीफा देने को कहा. हालांकि टीडीपी ने भाजपा के साथ संबंध बनाए रखने की गुंजाइश भी छोड़ी है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष एन चंद्रबाबू नायडू ने आनन फानन में बुलाये गये संवाददाता सम्मेलन में कहा कि टीडीपी ने‘‘ राज्य के हित में दर्दभरा फैसला’’ किया क्योंकि उसके पास‘‘ कोई अन्य विकल्प’’ नहीं था. मोदी सरकार के ये दो मंत्री केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री अशेाक गजपति राजू और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री वाई एस चौधरी हैं.

टीडीपी के इस फैसले से कुछ घंटे पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विशेष राज्य के दर्जे वाले राज्य को मिलने वाले कोष के बराबर राशि आंध्र प्रदेश को दी जा सकती है. हालांकि उन्होंने कहा कि राजनीति धन की मात्रा नहीं बढ़ा सकती.नायडू ने भविष्य में गठबंधन बने रहने की संभावना की ओर संकेत देते हुए कहा, ‘‘हम राजग से बाहर आ गए हैं लेकिन (भाजपा टीडीपी संबंधों को लेकर) दलों से जुड़े मामलों पर बाद में फैसला किया जाएगा.’’ जेटली ने कहा कि जैसी कि नायडू मांग कर रहे हैं, पूर्वोत्तर के राज्यों तथा तीन पर्वतीय राज्यों के अलावा किसी अन्य राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देना14 वें वित्तीय आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद अब संवैधानिक रूप से संभव नहीं हैं.

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