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उद्धव ठाकरे : फोटोग्राफर से मुख्यमंत्री तक का सफर

मुंबई । शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शिवाजी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में पद व गोपनीयता की शपथ लेकर सूबे के 29वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। दादर में बालमोहन विद्यामंदिर से प्राथमिक शिक्षा व सर जेजे स्कूल आफ अप्लाईड आर्ट्स से आर्टस में स्नातक की डिग्री पाने के बाद उनका मन सिर्फ फोटोग्राफी में ही रमता था। उनके चित्रों को विश्व स्तर पर ख्याति मिल चुकी है। 

उनका मन कभी भी राजनीति में नहीं रमता था। वे तो सिर्फ फोटोग्राफी में ही मग्र रहते थे, लेकिन उन्होंने पिता बालासाहब ठाकरे को मदद करने के लिए न चाहते हुए भी 1997 व 2002 में मुंबई महानगरपालिका चुनाव में थोड़ा बहुत काम किया था।

2003 में लोनावाला में शिवसेना की बैठक में उनको कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद 2004 में बालासाहब ठाकरे ने उद्धव ठाकरे को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। बालासाहब ठाकरे बीमार रहने लगे थे, इसलिए 2006 में शिवसेना के मुखपत्र दैनिक सामना की संपादकीय की जिम्मेदारी भी उनपर आ गई।

इसी दौरान बालासाहब ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग होकर नई पार्टी का गठन कर लिया था, लेकिन बालासाहब की बीमारी व शिवसेना संगठन को संभालने की दोहरी जिम्मेदारी का निवर्हन उद्धव ठाकरे ने बखूबी किया। 

जहां लोग शिवसेना के टूटने की चर्चा कर रहे थे, वहीं एक गंभीर व स्वच्छ नेतृत्व प्रदान करते हुए उद्धव ठाकरे ने शिवसेना को सत्ता तक पहुंचा दिया है। चुनाव से पहले ही प्रचार के दौरान उद्धव ठाकरे कह रहे थे कि इस बार महाराष्ट्र में शिवसेना का मुख्यमंत्री बनेगा।

उनके राजनीतिक विरोधी उन्हें हल्के में ले रहे थे। पिछले 30 साल की सहयोगी पार्टी भाजपा सत्ता में ढाई साल का मुख्यमंत्री पद देने के लिए राजी नहीं हुई। इसलिए उद्धव ठाकरे ने शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की महाविकास आघाड़ी बनाकर मुख्यमंत्री पद आखिर शिवसेना को दिलवा दिया है। 

 

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