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कश्मीर घाटी में फैली केसर की बहार

सेब के बाद अब कश्मीर घाटी में केसर की बहार आई हुई है. घाटी के चार जिलों में इसकी बड़ी संख्या में खेती होती है. देश से लेकर विदेशों में भी कश्मीरी केसर की सबसे ज्यादा मांग रहती है. एक किलोग्राम केसर की कीमत लाखों रुपये में होती है.

अक्तूबर से नवंबर के बीच आता है फूल

केसर का हल्का बैंगनी रंग का फूल अक्तूबर के मध्य में आना शुरू होता है और नवंबर के पहले हफ्ते तक रहता है. केसर की खेती सबसे ज्यादा पुलवामा, बडगाम, श्रीनगर और किश्तवाड़ जिलों में होती है. इसकी मांग सबसे ज्यादा दवाई, कॉस्मेटिक और खुश्बू बनाने वालों के बीच रहती है.

कड़ाके की ठंड में बीनते हैं फूल

केसर का फूल इकठ्ठा करने के लिए पूरा परिवार एक साथ खेत में सुबह-सुबह कड़ाके की ठंड में बीनने के लिए जाते हैं. इसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चे तक शामिल होते हैं. जमीन पर पड़े नारंगी रंग के फूलों को चुनकर उन्हें एक बॉस्केट में रखा जाता है.

बॉस्केट में फूल लाने के बाद फूल के पत्तों को आसानी से खोलकर के उनमें से केसर को निकाल कर लोग प्लेट में रखते हैं.

इसलिए कहा जाता है सोना

केसर को गोल्डन मसाला भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कश्मीरी केसर को पूरे विश्व में गुणवत्ता के मामले में सबसे अच्छा माना जाता है. उत्पादन में ईरान के बाद यह दूसरे नंबर पर है. घाटी में केसर से बनी चाय मिलती है, जिसे कहवा के नाम से जाना जाता है. वहीं बिरयानी से लेकर के खीर तक को बनाने के लिए इसको स्वाद बढ़ाने के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

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