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केंद्र की योजनाओं को अनुमति नहीं दे रहीं ममता : मोदी

कोलकाता, 12 जनवरी | ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पश्चिम बंगाल की सरकार पर अप्रत्यक्ष हमले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि केंद्र की कल्याणकारी योजनाएं, जैसे आयुष्मान भारत व पीएम किसान सम्मान निधि को राज्य में अनुमति नहीं दी जा रही है, क्योंकि राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में ट्रांसफर की जा रही है, जिससे बिचौलियों, कमीशन व सिंडिकेट को रोक दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की योजनाओं का लाभ राज्य के लोगों को नहीं मिलने से उन्हें कष्ट होता है।

मोदी ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की 150वीं सालगिरह के उद्घाटन के बाद कहा, “अगर राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना और एपीएम किसान सम्मान निधि को अनुमति देती है .. मुझे नहीं पता कि वे देंगे, लेकिन अगर वह देते हैं, तो राज्य के लोगों को भी इन योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।”

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित लगभग 75 लाख लोगों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया है, जबकि पीएम किसान सम्मान निधि से 8 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में लगभग 43,000 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं।

प्रधानमंत्री ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “कोई बिचौलिया नहीं है, कोई कटमनी नहीं है। कोई सिंडिकेट नहीं है। जब पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचता है, तो किसी को कट नहीं मिलता, सिंडिकेट नहीं चलता।”

बंगाल का सिंडिकेट के रूप में जिक्र युवाओं के करटेल (संघ) से है, जो राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठाते हैं और प्रमोटरों व ठेकेदारों को घटिया गुणवत्ता की निर्माण सामग्री ज्यादा कीमत पर खरीदने के लिए बाध्य करते हैं।

ममता बनर्जी का नाम लिए बगैर मोदी ने भगवान से राज्य के नीति निर्माताओं को सद्बुद्धि देने की उम्मीद जताई।

उन्होंने कहा, “बंगाल के गरीब लोगों को जब वे बीमार पड़ते है तो उन्हें आयुष्मान भारत योजना और पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ किसानों को पाने दें, जो उनके जीवन में शांति व समृद्धि सुनिश्चित करती है।”

उन्होंने कहा, “बंगाल के बहादुर बेटों का विकास सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए, जिन्होंने गांवों व गरीब लोगों के विकास के आवाज उठाई। यह एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है या एक सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जिम्मेदारी है।”

केंद्र पर आयुष्मान भारत योजना में राज्य के योगदान की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी सरकार बीते साल की शुरुआत में योजना से अलग हो गई थी और शिकायत की थी कि मोदी सरकार इसका इस्तेमाल अपने शासन के प्रचार के लिए कर रही है।

 

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