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क्या शुभेंदु अधिकारी की नाराजगी दूर कर पाएंगे पीके?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके कैबिनेट के कद्दावर मंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच तालमेल बैठाने की जिम्मेदारी अब राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने संभाल ली है।
किशोर उन्हें मनाने के लिए उनके घर पर पहुंच गए। उन्होंने घर पर शुभेंदु के पिता और सांसद शिशिर अधिकारी से मुलाकात कर मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरान शुभेंदु की उनसे फोन पर बात हुई। प्रशांत की इस पहल से परिस्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी के दाहिने कहे जाने वाले शुभेंदु अधिकारी कभी भी पार्टी से अलग हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों में जुटी ममता सरकार के लिए यह किसी झटके से कम नहीं होगा।
दरअसल, शुभेंदु अधिकारी के गुरुवार को कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचने से तमाम अटकलों का दौर शुरू हुआ था। इसके साथ ही तीन और मंत्री राजीव बंद्योपाध्याय, गौतम देव और रवींद्रनाथ घोष भी बैठक में नहीं पहुंचे। यह भी खबर है कि शुभेंदु अधिकारी के तीनों करीबी नेताओं की सुरक्षा भी हटा दी गई है। शुभेंदु पिछले कई दिन से पार्टी में अपनी उपेक्षा से नाराज चल रहे हैं। भाजपा पार्टी की ओर से उन्हें खुला ऑफर दे चुकी है।
उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के 42 में से 18 सीटें जीतने के बाद आशंकित ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर को अपने रणनीतिकार के रूप में नियुक्त किया था। आरोप है कि ममता अपनी पार्टी में अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को दूसरे अन्य नेताओं से ज्यादा अहमियत दे रही हैं और उन्हें अपने बाद उत्तराधिकार सौंपने की तैयारी में हैं। इससे शुभेंदु अधिकारी जैसे कद्दावर नेता नाराज बताए जा रहे हैं। ममता के बाद अगर तृणमूल कांग्रेस में किसी नेता का सबसे बड़ा जनाधार है तो वह शुभेंदु अधिकारी ही हैं। पिछले कई दिनों से वह मेदिनीपुर जिले में अपनी अलग रैलियां और जनसभा कर रहे हैं, जिसमें ममता बनर्जी का नाम तक नहीं लेते। अधिकारी के भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हैं। इस बीच उन्हें ममता के साथ बनाए रखने की कमान अब खुद पीके ने संभाल ली है।
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