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क्या ख़त्म हो रहा कोरोना का कहर?

दुनियाभर में कोरोना वायरस बढ़ता ही जा रहा हैं और अब तक एक करोड़ 98 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं। ऐसे में इसकी भयावहता लोगों के मन में बस चुकी हैं।

लेकिन 40 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीजों में किसी प्रकार का लक्षण ना दिखाई देने की वजह से इसके समाप्त होना बताया जा रहा हैं। आज हम आपको इससे जुड़ी जरूरी रिपोर्ट की जानकारी देने जा रहे हैं। तो आइये जानते हैं इसके बारे में।

वैसे तो यह बात बहुत पहले साफ हो चुकी है कि कोरोना से संक्रमित कई मरीजों में कोई लक्षण दिखते ही नहीं हैं। अब इसी मामले पर सैन फ्रांसिस्को स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में इंफेक्शस डिजीज की विशेषज्ञ मोनिका गांधी ने एक शोध किया है। उनका कहना है कि कोरोना वायरस के गैर-लक्षणी मरीजों की उच्च दर अच्छी बात है। यह निजी तौर पर भी और समाज के लिए भी बहुत अच्छा संकेत है।

मोनिका गांधी का एक लेख इसी महीने जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। इस लेख में उन्होंने बताया है कि कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू नहीं किया था, तब 15 फीसदी लोग गैर-लक्षणी थे, लेकिन बाद में जब लोगों ने मास्क पहनना शुरू किया तो यह आंकड़ा बढ़ गया। उसके बाद 40 से 45 फीसदी कोरोना संक्रमित लोग गैर-लक्षणी हो गए।

बिना लक्षणों वाले संक्रमितों के और भी कई मामले देखे गए हैं। बोस्टन के होमलेस शेल्टर को ही ले लीजिए। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां 147 लोग कोरोना संक्रमित हैं, लेकिन इनमें से 88 फीसदी मरीज गैर-लक्षणी हैं। इसी तरह आर्क में टाइसन फूड्स पॉल्ट्री प्लांट में भी 481 लोग संक्रमित हैं, लेकिन इनमें से 95 फीसदी मरीजों में कोई लक्षण ही नहीं देखे गए हैं।

चूंकि दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वैक्सीन संक्रमित होने के खतरे को सिर्फ 50 या 60 फीसदी तक ही रोक सकती है। अमेरिका के कोरोना विशेषज्ञ और व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. एंथनी फाउची का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के उपायों की जरूरत तब भी बनी ही रहेगी।

 

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