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चुनाव से पहले बंगाल में उठ रही राष्ट्रपति शासन की मांग

कोलकाता
पश्चिम बंगाल में इस समय जिस तरीके के हालात हैं उससे आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा बनना तय है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर होने के साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की वकालत की। वहीं राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाए हैं और संविधान के हिसाब से कदम उठाने की बात कही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इसका जिक्र करके ममता सरकार को इशारों-इशारों में चेतावनी दे चुके हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी ने ममता सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी में गुटबाजी से परेशान ममता के लिए राष्ट्रपति शासन नया सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि बीजेपी का यह भी कहना है कि ममता इसके जरिए विक्टिम कार्ड खेलने वाली हैं।

धनखड़ बोले- संविधान के हिसाब से उठाएंगे कदम
धनखड़ ने आगे कहा, ‘मैं बंगाल की हालत को लेकर चिंतित हूं। मैं नहीं चाहता कि पश्चिम बंगाल की जनता यह विश्वास खो दे कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव भी हो सकता है। मैं राष्ट्रपति शासन लगाने पर तो कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन भारत के संविधान के तहत जो शक्तियां मुझे मिली हैं, जनता के हित में संविधान के हिसाब से ही कदम उठाएंगे। एक राज्यपाल के तौर पर मैं सिर्फ संविधान के आदेश का पालन करता हूं। मैं सिर्फ संविधान का एजेंट हूं।’

बंगाल पुलिस टीएमसी कैडर की तरह काम करती है-बीजेपी
उधर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या और उनपर हो रहे हमलों के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। गुरुवार को बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष के काफिले पर पत्थरबाजी हुई। इसका विरोध करने वाले तकरीबन 40 बीजेपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले ले लिया। बंगाल बीजेपी चीफ दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी की कैडर की तरह काम कर रही है।

‘निष्पक्ष चुनाव के लिए बंगाल में लागू हो राष्ट्रपति शासन’
दिलीप घोष ने कहा, ‘पुलिस के सामने नेताओं पर हमले होते हैं लेकिन एक एफआईआर नहीं होती। उल्टा हमारे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया जाता है।’ दिलीप घोष ने आगे कहा, ‘ममता बनर्जी खुद चाहती हैं कि राज्य में 356 लागू हो जाए। वह केंद्र सरकार को इसके लिए मजबूर कर रही हैं ताकि चुनाव के दौरान विक्टिम कार्ड खेल सकें। हालांकि बंगाल के लोग भी कह रहे हैं कि जब तक यह सरकार रहेगी तब तक निष्पक्ष चुनाव नहीं हो पाएंगे। इसलिए राष्ट्रपति शासन जरूरी है।’

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