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जनसंख्या विस्फोट के चंगुल में भारत

जब से हम लोगों ने पढ़ना-लिखना और समझना शुरू किया है तब से कुछ शब्द ऐसे रहे हैं जिन्होंने हमारा पीछा कभी नहीं छोड़ा। मसलन ‘जनसंख्या विस्फोट’, ‘बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणाम’। जनसंख्या के इस विस्फोट और दुष्परिणाम ने अपना सिर हिमालय जैसा ऊंचा कर लिया है। ऐसे में यह जरूरी था कि देश के मुखिया इस बारे में बोलें। देशवासियों को समझाएं कि इसे नहीं रोका गया तो हम कितना भी मेहनत कर लें अपनी जनता को सुख-शांति नहीं प्रदान कर सकते हैं।

कितने भी अस्पताल बना लें, चिकित्सकों की बहाली कर लें लेकिन जिस रफ्तार से जनसंख्या बढ़ रही है उस रफ्तार से उसकी देखरेख कर पाना मुश्किल है। ऐसे में इस विस्फोट को रोकना ही एक मात्र उपाय है। पीएम मोदी ने अपने छठे स्वतंत्रता दिवस संबोधन में बढ़ती आबादी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में एक जागरूक वर्ग है, जो अपने घर में शिशु को जन् म देने से पहले भली-भांति सोचता है कि मैं कहीं उसके साथ अन् याय तो नहीं कर दूंगा। उसकी जो मानवीय आवश् यकताएं हैं उनकी पूर्ति मैं कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा, उसके जो सपने हैं, वो सपने पूरा करने के लिए मैं अपनी भूमिका अदा कर पाऊंगा कि नहीं कर पाऊंगा।

इन सारे पैरामीटर से अपने परिवार का लेखा-जोखा लेकर हमारे देश में आज भी स्व: प्रेरणा से एक छोटा वर्ग परिवार को सीमित करके, अपने परिवार का भी भला करता है और देश का भला करने में बहुत बड़ा योगदान देता है। छोटा परिवार रखकर वह देश भक्ति को ही प्रकट करते हैं। हम भी उनसे सीखें और सोचें कि जो शिशु जन्म लेगा, क् या उसकी आवश् यकताओं की पूर्ति के लिए हमने अपने-आपको तैयार कर लिया है? क् या हम उसको समाज के भरोसे ही छोड़ देंगे? कोई मां-बाप ऐसा नहीं हो सकता है, जो अपने बच् चों को जन्म देकर इस प्रकार की जिंदगी जीने के लिए मजबूर होने दे और इसलिए एक सामाजिक जागरूकता की आवश् यकता है।

जाहिर है भारत जैसे शक्तिशाली राष्ट्र का प्रधानमंत्री यदि जनसंख्या विस्फोट पर चिंतित है इसका मतलब यह है कि पानी सिर से निकल चुका है। अब समाज को आगे आने की जरूरत है। भारत में बढ़ रही जनसंख्या पर संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों को देखने पर यह एहसास होता है कि हम किस तरह 1950 से लेकर अभी तक 37 करोड़ से बढ़कर 1 अरब 37 करोड़ जनसंख्या वाला देश हो चुके हैं।

भूभाग की दृष्टि से भारत विश्व का 7 वां बड़ा देश है। जनसंख्या की दृष्टि से चीन के बाद भारत विश्व का दूसरा बड़ा देश। 1950 में जहां प्रति वर्ग किमी रहने वालों की संख्या 114.47 थी। वह बढ़कर आज 415.63 हो चुकी है। सहज शब्दों में कहा जाए तो आज से 70 वर्ष पूर्व भारत में एक किमी के क्षेत्रफल में 114 लोग रहते थे वहीं अब 415 लोग रहते हैं।

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