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ठंड में कितना कहर ढाएगा कोरोना वायरस?

प्रोफेसर इयान ने कहा, हालांकि, भारत जैसी जगह में इन्फ्लुएंजा के कई मौसम हैं। सर्दियों की तुलना में यहां इन्फ्लुएंजा मॉनसून के मौसम में पीक पर होता है। मुझे नहीं लगता कि यह कोरोना वायरस के लिए मायने रखता है। सर्दी या बरसात के मौसम में सांस से जुड़ी अन्य बीमारियां भी होने लगती है हैं हालांकि कोरोना वायरस अब तक इस पैटर्न पर फिट नहीं हो पाया है।

सर्दियों में क्यों बढ़ता है संक्रमण

पश्चिमी देशों में ठंड बहुत अधिक पड़ती है और लोग घरों में ही रहते हैं। ऐसे में घर में अगर एक बार वायरस घुस गया तो एक साथ रहने वाले सभी लोगों के संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये बात भारतीय संदर्भ में सही नहीं है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के पूर्व उप निदेशक डॉक्टर एम एस चड्ढा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘भारत में लोग हमेशा घर के अंदर नहीं रहते हैं, वो धूप की तालाश में बाहर आते हैं जिससे घर में वेंटिलेशन बेहतर रहता है।’


अन्य देशों में कोरोना वायरस की स्थिति

इन्फ्लुएंजा एक सर्दियों की बीमारी है। ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि दक्षिणी गोलार्ध के देशों में मई-जुलाई में सर्दियों के मौसम में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यहां तक कि इस बार यहां इन्फ्लुएंजा के मामलों में भी वृद्धि नहीं हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि लोग कोरोना वायरस से बचने के लिए भी पहले से ही सोशल डिस्टेंसिंग रख रहे थे जिसकी वजह से फ्लू के मामलों में भी कमी देखी गई।

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