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पश्चिम बंगाल: पर्यावरण को बचाने का संदेश

दिवाली के दूसरे दिन पूरे उत्तर भारत में भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन विवाहित बहने अपने भाईयों को अपने घर बुलाती हैं. टिका-चंदन लगाती हैं, बजरी खिलाती हैं और उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं. लेकिन इस मौक़े पर पश्चिम बंगाल की कुछ महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों को बचाने की मुहिम को एक नाया मुक़ाम दे दिया.

अख़बार प्रभात ख़बर की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रत्येक साल की तरह इस बार भी कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरणविद् सुभाष दत्ता की ओर से तेलकल घाट पर किया गया. बहनों ने इस दौरान पेड़ों पर चंदन का तिलक लगाया और धूप व अगरबत्ती जलाकर पूजा की.

पांरपरिक गीत गाकर बहनों ने उनका मुंह भी मीठा कराया. श्री दत्ता ने बताया कि जिस तरह विकास के नाम पेड़ों की अंधाधुंध कटायी की जा रही है, उसी के प्रतिवाद में हम प्रत्येक साल पेड़ों को भाई बना कर भैया दूज पर्व मनाते हैं. उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत यह संदेश देने कोशिश की गयी है कि पेड़ हमारे लिए कितने जरूरी हैं.

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