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बंगाल का दिल फिर से जीतने की कोशिश कर रही हैं ममता बनर्जी

नई दिल्ली- लोकसभा चुनाव में लगे झटके से उबरने के लिए ममता बनर्जी अपनी रणनीतियों को दुरुस्त करने में लग चुकी हैं। लोगों का दिल फिर से जीतने के लिए तृणमूल कांग्रेस की नेता हर वो जतन कर रही हैं, जिससे पश्चिम बंगाल की जनता उनपर फिर से पहले की तरह भरोसा करना शुरू कर दे।

राज्य में उनका पहला प्रयास बीजेपी की बढ़त को रोकना है। इसके लिए वो अभी मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर पहल कर रही हैं। पहला, उन्होंने सरकारी बाबुओं को रिझाने के लिए उनको दी जाने वाली सुविधाएं बढ़ाना शुरू कर दिया है। दूसरा, उन्होंने लोकसभा चुनाव के समय से ही ‘बंगाल प्राइड’ को उभारकर मीडिल क्लास बंगालियों को टीएमसी से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। तीसरा, उनका जोर ऊंची जातियों के लोगों को भी अपने साथ लाने का है। क्योंकि, उनकी छवि सिर्फ मुस्लिमों की चिंता करने वाली नेता की बन चुकी है या कम से कम बीजेपी ऐसी छवि बनाने में सफल रही है। इसके अलावा कई और फैक्टर भी हैं, जिसपर उन्होंने एक साथ ध्यान देना शुरू कर दिया है।

बंगाल की ‘मान-मर्यादा’ को प्राथमिकता

बंगाल में दीदी बीजेपी के हिंदुत्व के फॉर्मूले को काउंटर करने के लिए बंगाली मान-मर्यादा का कार्ड भी खेल रही हैं। तृणमूल के एक नेता के मुताबिक, “जैसा कि हम सब जानते हैं कि बंगाल के लोगों के लिए बंगाली संस्कृति बहुत प्यारी है। और हिंदी हार्टलैंड वाले राज्यों के हिंदी-भाषी नेताओं का एक ग्रुप उसे खत्म करना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा कि वे ऐसा इसलिए करते हैं, क्योंकि वे बंगाली समाज से नहीं जुड़े हैं। हो सकता है कि उनका इशारा बंगाल में बीजेपी के प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की हो। यही नहीं ममता के इशारे पर बंगाल के महापुरुषों के बड़े-बड़े पोस्टर भी लगाने का प्रचलन शुरू किया गया है, जिसपर बीजेपी के ‘जय श्रीराम’ नारे की काट के तौर पर ‘जय हिंद, जय बंगला’ नारे लिखे जाने लगे हैं। टीएमसी कीओर से बंगाली मान-मर्यादा पर तबसे जोर दिया जाने लगा है, जब ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा तोड़ी गई थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्कूलों में बंगाली भाषा को भी मैनडेटरी करा चुकी हैं।

लोगों से कनेक्ट होने की कोशिश

लगता है कि दीदी महसूस कर रही हैं कि अगर पिछले सात वर्षों की सरकार में वो जन-भावनाओं से अलग नहीं हुई होतीं, तो लोग भी उनसे दूर होने को मजबूर नहीं हुए होते। इसलिए, वो नीतीश कुमार के सहयोगी और चर्चित राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पश्चिम बंगाल लेकर गई हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री को 2021 के चुनाव के लिए लोगों से जुड़ने का मंत्र देना शायद शुरू भी कर दिया है। माना जा रहा है कि इसी का असर है कि अब दीदी ने अपने कैडरों को हिंसक वारदातों से दूर ही रहने के लिए आगाह कर दिया है। जनता से जुड़ने के लिए उन्होंने दूसरे कदम भी उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने कोलकाता के मेयर फिरहद हकीम को हफ्ते में कम से कम एक बार जनता से उनकी समस्याओं को सीधे सुनने और उसका समाधान देने का हुक्म दिया है। 

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