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बंगाल में लाखों लोगों की जमीन लील रही गंगा

कोलकाता। उत्तराखंड के गोमुख से निकलकर 11 राज्यों से गुजरते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली गंगा रास्ते में पड़ने वाले हर एक राज्य की जीवनदायिनी है। लेकिन अब राज्य और केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण पश्चिम बंगाल के पांच जिलों के लाखों लोग तट कटाव की वजह से परेशान हैं। गंगा 11 राज्यों का पानी बंगाल की खाड़ी में लाती है। करोड़ों टन तलछट का भी परिवहन करती है। लाखों हेक्टेयर जमीन को उपजाऊ बनाती है लेकिन यहां हजारों एकड़ जमीन को भी अपनी आगोश में ले लेती है। फरक्का बैरेज के नीचे गंगा के तटवर्ती इलाकों के बंगाल स्थित पांच जिलों में रहने वाली लाखों की आबादी तट कटाव की समस्या से जूझ रही है। मालदह, मुर्शिदाबाद, नदिया, हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों में हर साल सैकड़ों एकड़ जमीन कटाव का शिकार बनकर नदी में समा रही है। इसका पूरे इलाके के पारिस्थिक तंत्र, सामाजिक और आर्थिक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा गंगा की ओर से लाई जा रही 70 करोड़ टन मिट्टी के तलछट के फरक्का के ऊपरी हिस्से में जमा होने व फरक्का के नीचे हिस्से में नदी के प्राकृतिक बहाव में आए परिवर्तन के कारण हो रहा है। गंगा तटबंध कटाव के कारण सर्वाधिक प्रभावित मालदह व मुर्शिदाबाद जिलों में 10 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। हर साल अकेले मालदह जिले में ही 30 वर्ग किलोमीटर जमीन गंगा में समाती जा रही है। इसमें बनी संरचनाएं, खेत, आजीविका के साधन नष्ट हो रहे हैं।

बंगाल के सिंचाई व जलपथ परिवहन विभाग के अनुसार फरक्का बैरेज के ऊपर के हिस्से में दो तरह की समस्या हो रही है। गंगा की दिशा बाईं ओर लगातार मुड़ रही है। इसके कारण भूखंड कटाव की समस्या पैदा होती है। वहीं 11 राज्यों के बाढ़ का पानी इसी चैनल से गुजरता है जिसके कारण सितम्बर महीने में मालदह में बाढ़ आती है। तट कटाव की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय का अभाव सामने आता है। केंद्रीय प्रतिनिधियों के मुताबिक जलशक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित की जाने वाली बैठकों में राज्य के प्रतिनिधि हिस्सा लेने से कतराते हैं। वहीं राज्य से जुड़े प्रतिनिधि कहते हैं कि समस्या के समाधान को लेकर केंद्र गंभीर नहीं है। इन सबके बीच हजारों पीड़ित हर साल अपनी जमीन, घर गंगा की भूखी लहरों में गंवा कर घरविहीन हो जा रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ना तो केंद्र सरकार और ना ही राज्य सरकार इस मामले में सक्रिय है। दोनों ही सरकारों के टकराव की वजह से लाखों लोग प्रभावित हैं और जनप्रतिनिधियों को इससे कोई सरोकार नहीं रह गया है।

 

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